
अजमेर के परकोटे को संरक्षण की दरकार, अवैध कब्जे पता लगाएं
अजमेर. अजमेर का ऐतिहासिक परकोटे के संरक्षण की दरकार है। लोगों का कहना है कि परकोटा सुरक्षा का पर्याय है। अजमेर में परकोटे की संरक्षा नहीं करने का खामियाजा शहर के ऐतिहासिक महत्व को भुगतना होता है। इससे सटी दुकानें लीज पर देते समय उनका सीमा ज्ञान या बाद में आसपास मनमाने ढंग से किए गए बदलाव आदि पर निगाह रखी जाती परकोटा सुरक्षित रखा जा सकता था।
कई स्थानों पर क्षतिग्रस्तअजमेर की पुरामहत्त्व की सिटी वॉल कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कई जगह से इसे तोड़ कर अतिक्रमण हो गए हैं। सिटी वॉल के अवशेष अजमेर के आगरा गेट, दिल्ली गेट, मदार गेट और उससे लगती हुई सीमाओं में देखे जा सकते हैं।
सीसा का भंडार रहा था अजमेरअजमेर की शीशाखान की गुफा से मुगलकाल और उसके पहले मराठा काल में शीशा निकाला जाता था। जिसे गलाकर तैयार करने के लिए आगरा गेट के पास शीशा आग़ार में भट्टियां लगा कर तपा कर ठोस बनाया जाता था। कालांतर में सीसा आग़ार का नाम शिव मंदिर बने होने के कारण शिवसागर हो गया। वर्तमान में सिटी वॉल का कुछ हिस्सा शिवसागर और उसके आगे भी नजर आता है।
इनका कहनासुरक्षा के लिए बनी दीवार के अब कुछ स्थानों पर अंश देखे जा सकते हैं। पुरातत्व विभाग को मौजूदा दीवार को सहेजने की जरुरत है।
अनुज गर्ग
परकोटा शहर की शान होती है। इसे बनाए रखना चाहिए। अनदेखी के कारण आज यह बहुमूल्य ऐतिहासिक परकोटा अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुका है।विपिन कुमार मित्तल
Published on:
27 May 2023 11:28 pm
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