
डिग्गी तालाब : अजमेवासियों की पानी की कीमत के प्रति बेपरवाही का जीता जागता सबूत
बलजीत सिंह. अजमेर. किसी ने सही कहा है कि अपनी ही करनी का फल हैं नेकियां-रुसवाइयां, आपके पीछे चलेगी आप की परछाइयां। ये मिसाल अजमेर पर यूं भी सटीक बैठती है कि किसी समय शहर में पारंपरिक जल स्रोतों के रूप में सैकड़ों कुएं, तालाब और बावडिय़ां थी। शहरवासी इन्हीं जल स्रोतों से अपनी प्यास बुझाया करते थे। शहर के भांवता और फॉयसागर पर बने पंप हाउस से नगरवासियों को नल के माध्यम से पीने का पानी उपलब्ध करवाया जाता था। उस समय तक भी पारंपरिक जल स्रोत ही जल प्राप्ति का जरिया था। फिर अल्पवर्षा और मानसून की बेरुखी के चलते धीरे-धीरे अजमेर के भू-जल स्तर में कमी होती गई। ऐसे में 1987 में अजमेरवासियों के लिए स्थायी जल प्रबंधन के लिए बीसलपुर जल परियोजना अस्तित्व में आई।
ऐसे में लोगों को सहज ही घर-घर जल सुलभ होने लगा है। ऐसे में अजमेरवासी अपने पारंपरिक जल स्रोतों के प्रति बेपरवाह हो गए। सैकड़ों कुएं-बावडिय़ां पाट दी गई। तालाबों के पेटे और जल आवक मार्गों पर कब्जे कर मकान बना लिए। नालों को अतिक्रमण के अजगर निगल गए। नियमित सार-संभाल और रख-रखाव के अभाव में अजमेर नगर के कुएं बावडिय़ां शनै-शनै कूड़ेदान में बदल दिए गए।
अजमेर नगर के बीचो बीच स्थित डिग्गी तालाब भी ऐसा ही एक पारंपरिक जल स्रोतों रहा था जो कभी आस-पास रहने वाले हजारों लोगों की प्यास बुझाया करता था। इस तालाब के जल आवक की सीर सीसा खान की गुफा से जुड़ी हुई थी। लेकिन बीसलपुर का पानी आने के बाद लोगों ने इसकी सुध लेनी ही बंद कर दी।
इस तालाब से अब किसी को प्यास बुजाने की कोई आस नहीं। लोगोंं ने डिग्गी तालाब में पूजन सामग्री और मूर्ति विसर्जन करके इसके पानी को पूरी तरह दूषित कर डाला है। सीसा खान की गुफा में कीचड़ गंदगी की वजह से अब तालाब में पानी की आवक भी बंद हो गई है।
वहीं पिछले साल मानसून की बेरुखी की वजह से बीसलपुर बांध में बहुत कम पानी आने से अजमेर शहर सहित जिले में जल के लिए हाहाकार मचा हुआ है यदि डिग्गी तालाब जैसे उपयोगी जलाशय की सार-संभाल की जाती तो जल किल्लत पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता था। डिग्गी तालाब की दुर्दशा अजमेरवासियों की अपने हालात की बेपरवाही का जीता-जागता सबूत है।
Updated on:
09 May 2019 11:15 pm
Published on:
09 May 2019 11:13 pm
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