अजमेर. शहर के जनप्रतिनिधि जिस ऐतिहासिक आनासागर झील में होने वाले कार्यों के लिए मौका मिलते ही खुद के योगदान और प्रयासों का बखान करने से नहीं अघाते थे, उसी झील के इन दिनों अपनी बदशक्ली के साथ नजर आने पर जनप्रतिनिधि और जिला-निगम प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। झील संरक्षण व सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों की राशि खर्च करने के बावजूद झील का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ने लगा है। झील में शहर के नालों का पानी गिरने से बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने की कवायद पूरी भी नहीं हुई कि अब झील में पानी कम होते ही इसके भराव क्षेत्र में मलबे और कूड़े-कचरे के ढ़ेर नजर आने लगे हैं। झील के किनारे सूखे भाग में गंदगी व कचरा डाला जा रहा है।
दस चरण में हुआ चौपाटी का निर्माणझील के चारों ओर चौपाटी निर्माण की परिकल्पना करीब ढाई दशक पुरानी है। विभिन्न एजेंसियों ने झील के चारों ओर करीब दस चरणों में चौपाटी निर्माण किया। अब अंतिम छोर पर रामनगर महावीर कॉलोनी के पीछे के हिस्से का निर्माण कराया जा रहा है। जिसे रामप्रसाद घाट तक जोड़ा जाएगा। इससे झील के चारों ओर करीब नौ किमी की परिधि रिंग के रूप में जुड़ जाएगी।
चौड़े आई लापरवाहीझील के चारों ओर पाथ- वे निर्माण के दौरान कार्यकारी एजेंसियों की लापरवाही झील की प्राकृतिक सुंदरता को लीलती चली गई। नतीजतन झील की भराव क्षमता, वेटलैंड एरिया व झील का दायरा घटता चला गया।अफसर-ठेकेदारों ने पाथ-वे को जहां-तहां मनमर्जी से तोड़-मरोड़ दिया। निर्माण कार्य का मलबा झील के पेटे में ही डालकर इसकी भराव क्षमता और परिधि को घटा दिया गया। अब झील का जल स्तर कम किए जाने के बाद यही सबकुछ नजर आने लगा है।
मलबे-कचरे का अंबार. . .आनासागर झील के किनारों पर जाने से इन दिनों वहां बदबू और बदशक्ली ही नजर आती है। पुष्कर रोड लेक फ्रंट, रीजनल कॉलेज चौपाटी व पुष्कर रोड के पास कई जगह पानी कम होने से मलबा और जमीन नजर आ रही है। लोगों ने भी यहां गदंगी करना शुरू कर दिया है।
फैैक्ट फाईल
1000 – साल पुरानी झील13 फीट – कुल भराव क्षमता
11 फीट – मौजूदा गेज9 किमी – परिधि क्षेत्र
25 वर्ष – विभिन्न चरणों में चारों ओर पाथ वे निर्माण