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प्रदेश के इस हॉस्पिटल में पडे़ है बीस लाख रुपए, लेकिन नहीं कर रहे उपयोग

  छह माह से बेकार पडे़ हैं 20 लाख रुपए, विकास हुआ न मिली मरीजों को सुविधा राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय : कायाकल्प योजना में मिली थी राशि, कार्मिकों को भी नहीं मिला हिस्सा
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अजमेर

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Sunil Kumar Jain

•

Updated: 6 Oct 2019, 11:28 PM IST

प्रदेश के इस हॉस्पिटल में पडे़ है बीस लाख रुपए, लेकिन नहीं कर रहे उपयोग

प्रदेश के इस हॉस्पिटल में पडे़ है बीस लाख रुपए, लेकिन नहीं कर रहे उपयोग

सुनिल जैन

ब्यावर. सरकारी महकमों में बजट के अभाव में विकास नहीं होना और सुविधा नहीं मिलना आम बात है लेकिन राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय में प्रशासन की अनदेखी के चलते बजट होने के बावजूद एेसा हो रहा है। कायाकल्प योजना में मिली बीस लाख की प्रोत्साह राशि छह माह से बेकार पड़ी है और इस राशि से न तो विकास और न ही मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए कोई कार्य किए गए। यहां तक कि कर्मचारियों को मिलने वाली प्रोत्साह राशि भी नहीं बांटी गई। कायाकल्प जयपुर निदेशालय की ओर से अक्टूबर माह में आई दो सदस्यीय टीम ने कायाकल्प के तहत फाइनल असेसमेंट किया। फाइनल असेसमेंट में टीम ने एकेएच को 494 अंक दिए हैं, जो कुल अंकों का 82.33 प्रतिशत था। एेसे में प्रदेश में अमृतकौर चिकित्सालय दूसरे स्थान पर रहा। 88.50 प्रतिशत अंको के साथ जिला चिकित्सालय जालौर प्रथम स्थान पर रहा। इसके लिए एकेएच प्रबन्धन को बीस लाख रुपए की राशि प्रोत्साहन राशि के रूप में दी गई। इस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल के विकास व मरीजों की सुविधा पर खर्च होना था और पच्चीस प्रतिशत राशि कार्मिकों में प्रोत्साहन राशि के रूप में बांटी जानी थी। लेकिन राशि को छह माह से ज्यादा का समय हो गया और कोई उपयोग या खर्च करना तो दूर कोई योजना तक नहीं बनाई गई है।

लगातार पहले तीन में शामिल

योजना के तहत प्रदेशर में अभी तक ऐसा कोई अस्पताल नहीं है, जो लगातार पहले तीन स्थानों में शामिल रहा है। योजना के तहत राजकीय अमृतकौर अस्पताल पहली बार तीसरे स्थान पर रहा, उसके बाद लगातार दो सालों तक अमृतकौर अस्पताल संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा, वहीं इस बार एकेएच अन्य अस्पतालों को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर रहा।

बदले तीन पीएमओ

यह राशि तत्कालीन पीएमओ डॉ. एम.के. जैन के कार्यकाल यानि फरवरी मार्च माह में आई। इसके बाद कार्यवाहक के रूप में डॉ. दिलीप चौधरी पीएमओ बने। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसके बाद डॉ. मुकुल राजवंशी को पीएमओ का दायित्व सौंपा। हाल ही में डॉ. आलोक श्रीवास्तव को पीएमओ पद ही जिम्मेदारी सौंपी गई।

मूल्यांकन के बाद मिलती रेटिंग

केंद्र सरकार ने काया कल्प योजना शुरू की। अस्पतालों में मरीजों से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए स्टैंडर्ड बनाया। इसमें विभिन्‍न बिंदुओं पर अस्पताल का मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें इलाज सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, मरीज की संख्या के आधार पर रेटिंग तय की जाती है। इसके अलावा वेंटीलेटर, प्रति बेड डॉक्टर और नर्स की संख्या, ओटी इक्यूपमेंट, एयर फिल्टर, संक्रमण से बचाव, ऑपरेशन में प्रोटोकाल का पालन, मरीज को कितने समय में इलाज मिला, यह भी देखा जाता है।

इनका कहना है...

कायाकल्प में बीस लाख रुपए मिले थे, इस बात की जानकारी है। इस सम्बन्ध में पता कर उचित कार्यवाही की जाएगी। डॉ.आलोक श्रीवास्तव, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, एकेएच ब्यावर