9 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मानसून की बेरूखी से नहीं हो रहा तापमान कम, मर रही मधुमख्खियां

पराग व शहद नहीं मिलने से प्रजनन दर घटी

2 min read
Google source verification

अजमेर

image

Amit Kakra

Jul 19, 2020

madhumakkhi palan Beekeeping farmers facing problems in sawaimadhopur rajasthan

मानसून की बेरूखी से नहीं हो रहा तापमान कम, मर रही मधुमख्खियां

अरूण कुमार वर्मा

सवाईमाधोपुर. मानसून की बेरुखी सिर्फ किसानों को परेशान नहीं कर रही है। भरतपुर संभाग के मधुमक्खी पालक भी परेशान है। अच्छी बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई थम गई है। नई फसल तैयार नहीं होने से मधुमक्खियों को 'परागÓ नहीं मिल पा रहा है। इससे उनकी वृद्धि व प्रजनन दर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इधर, तापमान में बढ़ोत्तरी उनकी मौत का कारण बन रही है।
अभी ये हाल तो नहीं मिलेगा सीजन का फायदा

रबी की मुख्य फसल सरसों में फूल आने के साथ मधुमक्खी पालकों का सीजन शुरू होता है। नवम्बर से मार्च तक इसकी अवधि रहती है, लेकिन इससे पहले मानसून का सीजन मधुमक्खियों के प्रजनन व बढ़ोत्तरी का होता है, जितनी ज्यादा मधुमक्खियां उतना फायदा, लेकिन बारिश नहीं होने से मधुमक्खियों की प्रजनन दर घट गई है। वहीं तापमान ज्यादा होने से उनकी मौत हो रही है।
खत्म हो जाएगी कॉलोनी

जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर नीमली खुर्द गांव के मधुमक्खी पालक ज्योतिष कुमार सिंह ने बताया कि उनके पास करीब 2 सौ बॉक्स है। प्रत्येक बॉक्स में 10 फ्रेम होते है। प्रत्येक फ्रेम में करीब 1 हजार मधुमक्खियां होती हैं। तापमान ज्यादा होने से मधुमक्खियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। कई बॉक्स की मधुमक्खियां पूरी तरह खत्म हो गई है। अगर ऐसे हालत रहे और बारिश नहीं हुई तो प्रत्येक बॉक्स पर 4 से 5 हजार रुपए का घाटा होगा। कुल हानि करीब 5 लाख की होगी।

नहीं मिल रहा पराग
मधुमक्खी पालक दरोगा सिंह ने बताया कि सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय के आस-पास बारिश के सीजन में बाजार व तिल्ली की फसल बोई जाती है। वहीं जंगली क्षेत्र होने से मधुमक्खियों को खूब पराग मिल जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। मधुमक्खियों की वृद्धि के लिए पराग व तैयार शहद खुराक के लिए चाहिए होता है। यह दोनों चीजें नहीं मिल रही है। विकल्प के तौर पर मधुमक्खियों को चीनी खिलानी पड़ रही है। अब तक 35 हजार रुपए चीनी पर खर्च कर चुके हैं।


बारिश नहीं होने से मधुमक्खियों की प्रजनन दर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे मधुमक्खी पालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ब्रहमसिंह, खेड़ा राम, भरतपुर