
chambal river water level crosses danger point causes flood in ater
धौलपुर. चंबल नदी में कोटा बैराज, पार्वती तथा कालीघाट का पानी की आवक व वर्षा से नदी नालों से आने वाले पानी से बने संभावित बाढ़ की संभावना है। चंबल नदी में जल स्तर बढ़ जाने के कारण नदी खतरे के निशान 129 .79 से करीब दो मीटर ऊपर चल रही है। इनके मद्देनजर प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला प्रशासन ने बचाव एवं राहत कार्य की तैयारियों के तहत तटवर्ती जिले में करीब 145 किलोमीटर क्षेत्र बह रही चम्बल नदी के नजदीक बसे 69 गांवों में अलर्ट जारी करते हुए एसडीआरएफ की टीमों तैयार रहने को कहा है।
जिला कलक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने बताया कि जिले में कोटा बैराज एवं कालीसिंध नदी से लगातार पानी की अत्यधिक आवक होने के कारण चंबल नदी के सीमावर्ती गांवों में जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, जो सरमथुरा उपखंड के कुछ गांव की सीमा तक पहुंच चुका है।
वर्तमान में जिले में एसडीआरएफ की एक टीम बाढ़ संभावित उपखण्ड सरमथुरा में तैनात है एवं बाड़ी, सरमथुरा एवं बसेड़ी उपखण्डों में राहत एवं बचाव के लिए इसका उपयोग किया जाएगा। बाढ़ संभावित क्षेत्र राजाखेड़ा व धौलपुर में भी निचले स्तर पर बसे हुए गांवों के प्रभावित होने की पूर्ण आशंका के चलते समस्या पैदा होने पर राहत एवं बचाव के लिए एक अतिरिक्त एसडीआरएफ दल की आवश्यकता होगी। यहां २४ घंटे आपात कालीन सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जनधन पशुधन आदि अन्य हानि न हो इसके इंतजाम किए गए हैं।
जिले के तट पर बसे है 69 गांव
चंबल नदी जिले में करीब 145 किलोमीटर क्षेत्र बह रही चम्बल नदी के नजदीक करीब 69 गांव बसे हुए है। जिले में बाढ़ एवं अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए उपखण्ड क्षेत्र राजाखेड़ा में एसडीआरएफ की टीमें गठित करने के संबंध में कार्यवाही शुरू कर दी है। बाढ प्रभावित गांवों में लोगों को उपलब्ध करवाई जाने वाली सुविधाओं व आगामी व्यवस्थाओं के सम्बंध में चर्चा की गई।
भराव वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले बिजली के तारों और खम्बों को दुरस्त करने, करंट से कोई जन व पशुहानि के संबंध में दिशा निर्देश दिए। राहत किट का वितरण, अधिकारियों के क्षेत्र में दौरे तथा राहत कार्य में असुविधा या समस्या होने पर तत्काल प्रशासन से समन्वय करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
चम्बल नदी में जलस्तर के बढ जाने के कारण बाढ़ जैसे हालातों के चलते पुख्ता इंतजाम किए गए हंै। जिला कलक्टर ने बताया कि जिले में बाढ़ के दौरान बच्चों व पशुओं में संक्रामक रोगों व इनके उपचार के लिए नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने को कहा गया है।
चिकित्सा कार्मिक रहेंगे तैनात
चम्बल नदी किनारे बसे सभी गांवों में चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों जिनमें आशा सहयोगिनी, एएनएम, तथा स्वास्थ्य मित्र को तैनात किया जाएगा हाल ही में 1300 स्वास्थ्य मित्र नियुक्त किए गए है। जिन्हें आवश्यक दवाईयां जिनमें ओआरएस घोल, ब्लीचिंग पाउडर, मेट्रोजिल, पैरासीटामोल सहित अन्य दवाईयॉ उपलब्ध करवाई गई है। यह मित्र प्राथमिक उपचार व दवाएं आशा सहयोगिनी, एएनएम व स्वास्थ्य मित्र के जरिए जरुरतमंद लोगों को उपलब्ध कराएंगे। समाजसेवी, जनप्रतिनिधि से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है। गर्भवती महिलाओं, कोरोना संक्रमितों व बुजूर्गों को सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था की जाएगी।
जल भराव की स्थिति में क्लोरीन गोलियों का का वितरण
बाढ़ के बाद जल भराव की स्थिति में चिकित्साकर्मियों, आशा सहयोगिनी, स्वास्थ्य मित्रा, ग्राम स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति सदस्य क्लोरीन की गोलियां वितरित करेंगे। पीने का पानी साफ वर्तन में उबालकर ठंडा करके 20 लीटर में एक गोली क्लोरीन पीसकर डालने एवं आधा घंटे के बाद पानी पी सकेंगे। इसके साथ ब्लीचिंग पाउडर का भी इस्तेमाल हो सकेगा।
फोगिंग मशीन से छिडक़ाव
जल स्तर कम होने पर मौसम जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए फोगिंग मशीन से छिडक़ाव किया जाएगा जिससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोका जा सके। एंटी लार्वा के लिए जले हुए ऑयल डालकर नष्ट किया जाएगा। जल में मच्छर जनित बीमारियां बढ़ती हैं। इनसे मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर, फाइलेरिया, डेंगू, कालाजार, ऑख का आना आदि बीमारियों की आशंका रहती है। प्र्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग एवं कीटनाशक छिडक़ाव कराने के निर्देश दिए गए है।
Published on:
25 Aug 2020 11:08 pm
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
Rajasthan: राजस्थान के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव, एक झटके में खत्म कर दिए 943 पद, जानें पूरा मामला

Ajmer News: अवैध एंट्री वसूली मामला, नसीराबाद बीजेपी मंडल अध्यक्ष निलंबित, ACB रिमांड पर पूछताछ जारी

