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कर्नल बैंसला का अल्टीमेटम…आरक्षण पर तुरन्त करें फैसला, वरना 8 फरवरी से होगा राजस्थान जाम

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colonel kirodi singh baisla

colonel kirodi singh baisla

बिजयनगर/बांदनवाड़ा (अजमेर).

गुर्जर आरक्षण आन्दोलन समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने एलान किया है कि राज्य सरकार की ओर से 8 फरवरी तक आरक्षण की घोषणा नहीं की जाती है है तो कोटपूतली, दौसा व भरतपुर सहित कई स्थानों पर बड़े स्तर पर आन्दोलन शुरू किया जाएगा।

बैसला ने साफ कहा है कि इस बार किसी भी टेबल पर वार्ता की बजाए आन्दोलन स्थल पर ही निर्णायक चर्चा होगी। कर्नल बैसला मंगलवार को बिजयनगर के पास साईमाला मन्दिर परिसर में आयोजित गुजर्र महापंचायत में बोल रहे थे। सभा में गुर्जर, गाडिया लौहार, बंजारा व रेबारी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इसमें बैसला ने लोगों से कहा कि धरना स्थल पर कम से कम दस दिन का आटा-पानी साथ लेकर आएं।

स्वर्णों के प्रति नरमी और गुर्जरों की उपेक्षा

बैंसला ने केन्द्र सरकार को आडे हाथ लेते हुए कहा कि अगर सरकार बिना मांगे व आन्देालन बगैर स्वर्ण समाज को दस प्रतिशत आरक्षण दे सकती है तो हमें क्यों वंचित किया जा रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार गुर्जरों को आरक्षण देने के मामले में गंभीर नहीं है। राज्य सरकार गुर्जर व अन्य समाज को 8 फरवरी तक आरक्षण की घोषणा कर दे। अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।

पगड़ी नहीं कफन बांधकर निकला हूं

बैसला ने कहा कि इस बार आरक्षण अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई होगी। कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों ने गुर्जर समाज को छला है। लोकसभा व विधानसभा चुनावों से पहले सभी ने वादे किए, लेकिन सत्ता मिलते ही सब भूलते आए हैं। अब पानी सिर से गुजर चुका है। पिछड़े वर्ग के लिए अब पगड़ी नहीं कफन बांधकर निकला हूं। धरने से तभी हटूंगा, जब मनमाफिक आरक्षण मिल जाएगा। कर्नल बैंसला ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस व भाजपा में शामिल गुर्जर नेता व जनप्रतिनिधि खुलकर आरक्षण के पक्ष में आएं। अन्यथा समाज उन्हें सबक सिखाएगा।

गुर्जर व अन्य समाज के लोग पिछड़े

गुर्जरों के वोट लेकर सत्ता व संगठन की मलाई खाने वाले नेता अब चेत जाएं। जो नेता कौम का साथ नहीं देगा। उसका सामाजिक व राजनीतिक बहिष्कार भी किया जा सकता है। बैंसला ने कहा कि गुर्जर व अन्य समाज के लोग पिछड़े होने के चलते शासन व प्रशासन में पर्याप्त भागीदार नहीं बन पाए। गाडिया लौहार सहित अन्य पिछड़े समाज के लोगों की हालत बदतर है। इस समाज के प्रत्येक परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।