- द्वितीय अपील का भी नहीं दिया जवाब, 25 अक्टूबर को व्यक्तिगत पेशी 'सूचना का अधिकार' कानून के तहत मांगी गई सूचनाएं निर्धारित अवधि में उपलब्ध नहीं कराना एवं सेकंड अपील की भी अनदेखी करना नगर निगम आयुक्त को भारी पड़ गया है।
अजमेर. 'सूचना का अधिकार' कानून के तहत मांगी गई सूचनाएं निर्धारित अवधि में उपलब्ध नहीं कराना एवं सेकंड अपील की भी अनदेखी करना नगर निगम आयुक्त को भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग ने निगम प्रशासन की लापरवाह कार्यशैली पर नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार को आगामी 25 अक्टूबर को सुबह 10 बजे कोर्ट संख्या तीन में स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया है।आवेदनों पर नहीं कार्रवाई
सागर विहार कॉलोनी निवासी नृसिंह दत्त दाधीच ने आरटीआई के तहत पांच अलग-अलग प्रार्थना पत्र नगर निगम में लोक सूचना अधिकारी निगम आयुक्त को पेश किए थे। जिस पर निगम की ओर से आवेदक को निर्धारित अवधि में सूचना नहींं दी गई।सेकंड अपील की भी उपेक्षा
इस पर परिवादी ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। लेकिन इसके बावजूद आयुक्त ने ना तो कोई टिप्पणी की और ना ही अपील का उत्तर भिजवाया। आयोग ने इसे अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत बताया। आयोग ने इस मामले में स्पष्टीकरण मांगे जाने के साथ ही निगम आयुक्त सुशील कुमार को 25 अक्टूबर को स्वयं हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
आवेदक ने मांगी थीं सूचनाएं
- ट्रेड लाईसेंस नवीनीकरण के लिए एक अप्रेल 2021 से 30 जुलाई 2021 तक नवीनीकरण किए गए प्रतिष्ठान स्वामियाें के नाम व उनके द्वारा चुकाई राशि।
- एक जनवरी 2021 में 8 फरवरी 2022 तक स्वास्थ्य शाखा संबंधी कितने आवेदन आए
- कितने आवेदनों में 7 दिन व 15 व 30 दिनों में सूचना उपलब्ध कराई
- कितने आवेदनों में प्रथम अपील बाद सूचनाएं दीं
- निगम की ओर से संचालित कुल कितनी इंदिरा रसोई संचालित
- इंदिरा रसोई आवंटन की प्रक्रिया
- अनुदान भुगतान के बिलों की जांच करने वाले अधिकारी की मौका निरीक्षण रिपोर्ट
- गत पांच सालों की ऑडिट जांच रिपोर्ट
- निगम की ओर से धारा 19/ 20 के तहत राज्य सूचना आयोग की ओर से निगम को दिए नोटिस व शास्तियां- निगम के कितने विभाग, उनके प्रभारी, पदनाम
- स्वास्थ्य शाखा प्रभारी की योग्यता, किसी एक विभाग में लगातार रहने व तबादले की स्थिति
- वर्ष 2015-16 व 2021- 22 तक सभी शाखाओं के निविदाएं व कार्य समाप्ति तक की कार्रवाई
- वर्ष 2015-16 व 2021- 22 तक सफाई, कचरा परिवहन, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कम्प्यूटर कार्य, टेंट, प्रिटिंग आदि के ठेकेदारों को किए भुगतान के बिल उनको प्रमाणित करने संबंधी पत्रावलियां।