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Patrika Keynote: अजमेर में ‘पत्रिका की-नोट’, ‘स्त्री: देह से आगे’ विषय विवेचन कार्यक्रम होगा कल

पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर अजमेर में ‘पत्रिका की-नोट’ के तहत ‘लोकतंत्र और मीडिया’ विषय पर मंथन।
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अजमेर

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Akshita Deora

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Updated: 20 Jan 2026, 4:55 PM IST

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फोटो- पत्रिका

Patrika Keynote In Ajmer: पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर मंगलवार को अजमेर में ‘पत्रिका की-नोट’ के तहत ‘लोकतंत्र और मीडिया’ विषय पर मंथन किया गया।

आगरा गेट स्थित मित्तल माल में होटल सरोवर पोर्टिको में आयोजित इस कार्यक्रम को मुख्य वक्तव्य के रूप में पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने संबोधन किया। उन्होंने कहा कि हमारा पहला दायित्व पीढ़ियों के बीच सेतु बनकर चलने का है। पिछली पीढ़ी से जो मिला है, उसे आगे की पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए। आज पढ़ाई का लक्ष्य केवल पेट भरने तक सीमित हो गया है। युवा यह सोचकर पढ़ते हैं कि उन्हें कितना पैकेज मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी तकनीक के सहारे आगे बढ़ रही है, लेकिन केवल तकनीक से यथार्थ को तलाश पाना संभव नहीं है।

कोठारी ने कहा कि जो बीज जमीन में नहीं गढ़ेगा, वह कभी पेड़ नहीं बन पाएगा। पत्रकार और साधु समाज को देने के लिए होते हैं, समाज से कुछ मांगते नहीं। यही पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता साधारण कार्य नहीं, बल्कि संकल्प लेकर करने वाला दायित्व है। संस्कृति को बचाए रखना भी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है।

विशिष्ट अतिथि महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश चन्द अग्रवाल ने कहा कि पत्रिका की पत्रकारिता सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनाओं और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करती है। जब पत्रकारिता संवेदनाओं और संस्कारों से जुड़ती है, तो वह आंदोलन का रूप ले लेती है और पत्रकारिता उसी आंदोलन का नाम है। उन्होंने कहा कि मैंने राजस्थान पत्रिका में केवल सूचना और ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन दृष्टि को पाया है, जो जीवन के विभिन्न आयामों का संगम करती है। उन्होंने पत्रिका को वटवृक्ष की उपमा देते हुए कहा कि इसी वटवृक्ष की छाया में समाज का विकास हुआ है।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा कि राजस्थान पत्रिका को हम सहज रूप से अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब गांवों में न बिजली थी, न पानी और न ही घरों में अखबार आता था। उस दौर में भी कई लोग ट्रेन और बसों से राजस्थान पत्रिका लेकर आते और गांव की चौपालों में बैठकर पढ़ते थे।

राय ने सूचना के अधिकार कानून लाने की प्रक्रिया में राजस्थान पत्रिका के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र की जड़ है। अगर पत्रकार मुद्दों को लोगों तक नहीं पहुंचाते, तो नागरिक अंधा और बहरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राजस्थान पत्रिका ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस एसएस कोठारी ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित किया। पत्रिका की-नोट के इस आयोजन में शहर के आमंत्रित प्रबुद्धजनों ने शिरकत की।

‘स्त्री:देह से आगे’ पर विषय विवेचन कल

वहीं बुधवार सुबह 10.30 बजे पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘स्त्री:देह से आगे’ पर विषय विवेचन कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कालेज के अम्बेडकर सभागार में होगा। इसमें अजमेर व आसपास की महिलाएं शामिल होंगी ।

की-नोट कार्यक्रम का सीधा प्रसारण इस क्यूआरकोड को स्कैन कर देखा जा सकता है।