ऑफलाइन व ऑनलाइन सुनवाई का रहेगा विकल्प पक्षकारों की सहमति या हाईकोर्ट के निर्देश पर ही लिए जा सकेंगे बयान थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही कोर्टपरिसर में मिलेगा प्रवेश
अजमेर. कोरोना गाइड लाइन के तहत सरकार की ओर से शुरू किए गए त्रि-स्तरीय जनअनुशासन दिशा-निर्देशों के तहत हाईकोर्ट ने भी अदालतों का संचालन हाईब्रिड मोड पर करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 21 जनवरी तक सभी प्रकरणों को गवाही से मुक्त रखा गया है। पक्षकारों की सहमति या उच्च न्यायालय के निर्देश होने पर ही गवाही हो सकेगी। नए दिशा निर्देशों के तहत वर्चुअल मोड पर व भौतिक रूप से अदालतों में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सुनवाई की जा सकेगी।
हाईकोर्ट ने जारी किया परिपत्र
हाईकोर्ट की ओर से सेशन व अधीनस्थ अदालतों के लिए हाल ही जारी परिपत्र के अनुसार सेशन कोर्ट परिसर में 75 प्रतिशत स्टाफ मौजूद रहेगा। शेष स्टाफ घर से काम करेगा। सुनवाई वर्चुअल मोड पर होगी लेकिन पक्षकारों की सहमति से फिजिकली भी सुनवाई हो सकेगी। इसके लिए संबंधित पक्षकार व वकील अदालत कक्ष में आ सकेंगे। किसी मामले में वकील या पक्षकार की अदम हाजिरी पर एकतरफा कार्यवाही अमल में नहीं लाई जा सकेगी।
अदालत परिसर में प्रवेश से पूर्व जांच
सेशन कोर्ट (session court) परिसर में प्रवेश निषेध रहेगा। केवल एक निर्धारित प्रवेश द्वार से पक्षकार अंदर जा सकेंगे। यहां थर्मल स्क्रीनिंग व वैक्सीन की एक डोज लगाने का प्रमाण दिखाना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व सेनिटाईजर का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करना होगा।
आवश्यक मामलों की ऑनलाइन सुनवाई
लोक अभियोजक विवेक पाराशर ने बताया कि अजमेर सेशन कोर्ट में पूर्व से ही 15 जनवरी तक कार्य स्थगन का ऐलान हो चुका है। हालिया परिपत्र में 21 जनवरी तक गवाही से छूट के निर्देश आने के बाद अब प्रकरणों में सिर्फ तारीखें ही पड़ेंगी। अदालतों को भी ऑनलाइन सुनवाई के लिए फोन नम्बर व लिंक को सार्वजनिक रूप से दर्शाना होगा। केस की ई-फाइलिंग पूर्व की भांति हो सकेगी।
कई पाबंदियां रहेंगी
कोर्ट स्टाफ के घर में किसी सदस्य के बीमार होने की सूचना देनी होगी। संबंधित कर्मचारी को चिकित्सकीय राय अनुसार अवकाश दिया जा सकेगा। परिसर में पान थूकने, धूम्रपान निषेध, फोटो स्टेट व अन्य दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग व सेनिटाईजर की पालना करनी होगी।
इनका कहना है
बार एसोसिएशन की ओर से कार्य स्थगित करने व कोविड प्रोटोकॉल की पालना करने की सूचना पहले ही न्यायालय प्रशासन को दी जा चुकी है। प्रोटोकॉल का ख्याल रखने के लिए वकीलों को भी कहा गया है। ऑनलाइन सुनवाई होगी।
मोहन सिंह राठौड़, अध्यक्ष बार एसोसिएशन