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साइबर थाना : अब तक 11 मुकदमे दर्ज, खुला एक भी नहीं

एक लाख रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी पर दर्ज होगा साइबर थाने में मुकदमा

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अजमेर

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Manish Singh

May 15, 2023

साइबर थाना : अब तक 11 मुकदमे दर्ज, खुला एक भी नहीं

साइबर थाना : अब तक 11 मुकदमे दर्ज, खुला एक भी नहीं

अजमेर. अनजाने में साइबर क्राइम या ठगी का शिकार हो रहे हैं तो साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवा सकते है। यहां पर साइबर विशेषज्ञ आंकड़ों का विश्लेषण कर बैंक खाते से निकाली रकम पुन: दिलवाने के प्रयास करते हैं।जिले में साइबर थाना रिजर्व पुलिस लाइन में एडिशनल एसपी अभय कमांड सेंटर के भवन में अस्थाई रूप से संचालित है। बीते 4 माह में साइबर थाने में 11 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। जिनमें से एक भी प्रकरण का निस्तारण नहीं किया जा सका है।

ऐसे मामलों का क्षेत्राधिकार

साइबर थाने में वही प्रकरण दर्ज किए जाते हैं जिसमें पीडि़त को बैंक खाते से पैसे की निकासी की जानकारी ना हो। ठग किसी एप, लिंक के माध्यम मोबाइल फोन, लेपटॉप हैक करके एक लाख से ज्यादा की रकम की निकासी करे। इससे कम रकम पर संबंधित क्षेत्र के थाने में ही मुकदमा दर्ज होगा।ज्यादा लोग 'एनी डेस्क' से बने शिकार

साइबर थाने में अब तक दर्ज हुए 11 प्रकरण में सबसे ज्यादा 'एनी डेस्क' एप के जरिए धोखाधड़ी का शिकार होने वालों के मामले हैं।

साइबर थाना स्टाफ-

थानाप्रभारी- विकास कुमार (आरपीएस)

निरीक्षक- नीतू राठौड़

उपनिरीक्षक- पारूल यादव

एएसआई- भगवानसिंह

साइबर एक्सपर्ट- हैड कांस्टेबल सुनील मील, विजेन्द्र सिंह व पांच सिपाही शामिल हैं।इनका कहना है...

साइबर थाने में ओटीपी, लिंक शेयर या एनी डेस्क जैसे एप का इस्तेमाल कर एक लाख रुपए से ज्यादा की ठगी की वारदात अंजाम देने वाले मुकदमे दर्ज होते हैं। दर्ज मुकदमों पर तकनीकी अनुसंधान किया जा रहा है।विकास कुमार, प्रभारी साइबर थाना

सोशल मीडिया एप से दो को बनाया शिकार
अजमेर. सोशल मीडिया व मोबाइल एप के जरिए शातिर ठग ने दो जनों को लाखों की चपत लगा दी। मामले में दोनों पीडि़तों ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है।

पुलिस के अनुसार पीसांगन चंडालिया मोहल्ला निवासी अशोक कुमार धनोपिया ने रिपोर्ट दी कि गूगल पर सर्च करने के दौरान आए कॉल पर कॉलर ने एनी डेस्क एप डाउन लोड करवाकर बैंक खाते से रकम की निकासी करवा ली। दूसरे मामले में नाका मदार बैंक कॉलोनी निवासी दिनेश खंडेलवाल ने रिपोर्ट दी कि उसको टेलीग्राम एप पर बनाए ग्रुप में उसको ज्वाइन करवाकर टास्क दिया गया। इसके बाद टॉस्क के भुगतान की आड़ में उसके बैंक खाते से लाखों रूपए की रकम की निकासी कर ली। साइबर थाना पुलिस ने पीडि़तों की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्जकर अनुसंधान शुरू कर दिया।