
police case against khadim
ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स के दौरान गुस्ल की रस्म में जन्नती दरवाजे के ताला लगाने के मामले में दरगाह नाजिम की ओर से दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी है।
पुलिस के अनुसार दरगाह नाजिम (सेवानिवृत्त आईएएस) आई.बी. पीरजादा ने शिकायत दी कि दरगाह में ख्वाजा साहब के उर्स के दौरान गुस्ल की रस्म के दौरान अज्ञात खादिम ने जन्नती दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया। इससे धार्मिक रस्म में बाधा पहुंची।
वहीं ताला लगाने से ख्वाजा साहब के लाखों मुरीदों की धार्मिक भावना व आस्था आहत हुई। पुलिस ने नाजिम आईबी पीरजादा की शिकायत पर मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया।
यह है मामला
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन ने उर्स के दौरान बेटे नसीरूद्दीन को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। इसका खादिमों ने विरोध किया। उसी दिन रात करीब 2.30 बजे दरगाह दीवान जब बेटे के साथ गुस्ल की रस्म के लिए पहुंचे तो जन्नती दरवाजा बंद कर दिया गया।
खादिम इस बात पर अड़ गए कि दीवान को बेटे के साथ प्रवेश नहीं दिया जाएगा वहीं दीवान बेटे के साथ ही जाने की बात पर अड़े रहे। इस बात को लेकर सुबह 5 बजे तक दरगाह दीवान जन्नती दरवाजे के सामने ही बेटे के साथ बैठे रहे। उनके वहां से जाने के बाद ही दरवाजा खोला गया।
आठ सौ पुरानी दरगाह
अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 800 साल से अधिक पुरानी है। ख्वाजा साहब 11 वीं सदी में अजमेर आए थे। वे यहां आनासागर-ऋषि घाटी के आसपास बैठकर इबादत करते थे। उनका रजब माह में यहीं इंतकाल हुआ। उनकी दरगाह क्षेत्र में मजार बनी हुई है। यहां प्रतिवर्ष 1 से 6 रजब तक सालाना उर्स होता है। इस उर्स में दूरदराज से जायरीन और कलंदर शामिल होते हैं। उर्स के दौरान कई रसूमात का आयोजन होता है। इस दौरान ख्वाजा साहब के वंशज और दरगाह दीवान गुस्ल की रस्म अदा करने जाते हैं।
पुराना है खादिम-दीवान में विवाद
दरगाह दीवान और खादिमों में विवाद कई बरसों से जारी है। इसमें दरगाह में होने वाली आय का भी विवाद शामिल है। खादिम कई बार दीवान जैनुअल आबेदीन के साथ टकरा चुके हैं। दीवान ने भी कई बार खादिमों पर परस्पर मामले दर्ज कराए हैं।
Published on:
13 Apr 2018 10:03 am
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