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राजस्थान में LPG के बढ़ते दामों के बीच सस्ता विकल्प DME, कम प्रदूषण और लागत, जानें फायदे

LPG की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच डाइमिथाइल ईथर (DME) सस्ते और स्वच्छ ईंधन के विकल्प के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह न केवल गैस खर्च कम कर सकता है, बल्कि प्रदूषण घटाने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है।
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अजमेर

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Akshita Deora

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रक्तिम तिवारी

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Updated: 27 May 2026, 11:28 AM IST

DME Vs LPG

DME और LPG का फोटो: AI

DME As Alternative To LPG: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में डाइमिथाइल ईथर (DME) एलपीजी के सस्ते और बेहतर विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया जाए तो यह भविष्य में देश के लिए व्यावहारिक और किफायती वैकल्पिक ईंधन साबित हो सकता है।

डीएमई को क्लीन-बर्निंग फ्यूल माना जाता है। इसका उपयोग सीधे एलपीजी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है, वहीं एलपीजी में 20% तक डीएमई मिलाकर भी उपयोग संभव है। दुनिया के कई देशों जैसे अमरीका, यूरोप और एशिया के विभिन्न हिस्सों में डीएमई का इस्तेमाल एलपीजी के साथ किया जा रहा है। भारत में भी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने एलपीजी में 8% तक डीएमई मिश्रण की अनुमति दे दी है। वर्तमान में महाराष्ट्र के सोलापुर में इसका प्लांट स्थापित किया गया है।

जानें डीएमई के प्रमुख फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार डीएमई के कई बड़े फायदे हैं। यह एलपीजी की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। इसके अलावा यह अधिक क्लीन फ्यूल माना जाता है और गैस की लागत कम करने में भी मददगार हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके उपयोग के लिए मौजूदा एलपीजी चूल्हों में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती।

कई उद्योगों में उपयोगी

डीएमई केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग होटल-रेस्टोरेंट, बेकरी, एयरोसोल, सिरेमिक, बल्ब-ट्यूबलाइट उद्योग, डियोड्रेंट, हेयरस्प्रे, पेंट, कीटनाशक और केमिकल लैब में विलायक के रूप में भी किया जा सकता है। इससे उद्योगों को भी सस्ता और स्वच्छ ईंधन विकल्प मिलने की संभावना है।

डीजल इंजन में भी उपयोगी

विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमई का सेटेन नंबर अधिक होने के कारण इसका उपयोग डीजल इंजन में भी किया जा सकता है। इससे प्रदूषण कम होने और कण उत्सर्जन लगभग समाप्त होने की संभावना रहती है। हालांकि इसका ऊर्जा घनत्व डीजल की तुलना में कम माना जाता है।

बन सकते हैं आत्मनिर्भर

कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रो. आलोक चतुर्वेदी के अनुसार यदि एलपीजी में 20 प्रतिशत तक डीएमई मिलाया जाए तो भारत गैस के क्षेत्र में काफी हद तक आत्मनिर्भर बन सकता है। इसके उत्पादन के लिए मेथनॉल और कोयले का उपयोग किया जाता है, जिससे देश में वैकल्पिक ईंधन के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।