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Good news: मां-बाप कोस रहे थे किस्मत को, एक मशीन ने कर दिया ये बड़ा चमत्कार

आर्थिक संकट से गुजर रहे इन परिवारों के बच्चों की नि:शुल्क इम्प्लांट सर्जरी ने उनकी जिन्दगी बदल दी।

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deaf and dumb

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अजमेर

बच्चों के जन्म के बाद से ही उनकी आवाज सुनने को कान तरस गए, चिकित्सकों से जांच कराई तो पता चला कि आपका बेटा/बेटी मूक बधिर है। तब माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। मगर जब इन बच्चों के लिए कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की सुविधा राज्य सरकार ने उपलब्ध कराई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद अब बच्चे सुन भी सकते हैं और बोल भी सकते हैं। इन बच्चों की जिन्दगी एकाएक बदल गई।

मूक-बधिर होने का दंश झेल रहे बच्चों की कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी होने के बाद अब बच्चे सामान्य बच्चों की भांति व्यवहार कर रहे हैं। आसानी से सुन एवं बोलने से अब वे मूक-बधिर भी नहीं रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष से प्रदेशभर के कुल 489 मूक-बधिर बच्चों के नि:शुल्क उपचार के लिए कुल 25 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

इनमें से तीन बच्चे अजमेर जिले के भी शामिल हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर में नि:शुल्क कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। प्रत्येक बच्चे पर करीब 5-5 लाख रुपए खर्च हुए हैं। आर्थिक संकट से गुजर रहे इन परिवारों के बच्चों की नि:शुल्क इम्प्लांट सर्जरी ने उनकी जिन्दगी बदल दी।

सामान्य विद्यालयों में पढ़ सकेंगेइन बच्चों की सर्जरी सफलतापूर्वक होने से अब सामान्य विद्यालयों में बच्चे पढ़ सकेंगे। वहीं सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनमें से कई बच्चों में सुनने की समस्या रही तो कुछ बोल पाने में भी सक्षम नहीं थे।

इन बच्चों की हुई सर्जरी

साइकोलॉजिस्ट दीपिका विजय के अनुसार सराधना निवासी दक्षिता पुत्री ओमप्रकाश, नसीराबाद निवासी विद्या पुत्री जितेन्द्र लुहार एवं जाल का खेड़ा निवासी अजय पुत्र शिवराज धाकड़ तीनों सुन नहीं सकते थे। इन बच्चों की जेएलएन अस्पताल में जांच कराकर एवं काउंसलिंग कर जयपुर के एसएमएस अस्पताल में कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी नि:शुल्क की गई।

अजमेर के तीन बच्चों की कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी जयपुर एसएमएस अस्पताल में हुई। मुख्यमंत्री सहायता कोष से करीब 5-5 लाख रुपए की लागत की सर्जरी नि:शुल्क की गई। इससे जरूरतमंद व गरीब परिवारों के बच्चों का इलाज संभव हो सका।
डॉ. रामलाल चौधरी, आरसीएचओ, अजमेर