
वन विभाग की नर्सरी के पास डीयर पार्क में पल रहे 53 हरिणों की जान सांसत में है। इन्हें कोटा के मुकुंदरा नेशनल पार्क ले जाने के लिए पिछले दो पखवाड़े से मशक्कत की जा रही है।
हरिणों को पकडऩे के लिए करंटयुक्त ग्रीन नेट (हरा जाल) लगाकर अमानवीय तरीका अपनाने का भी मामला सामने आया है। वहीं भयभीत हरिण रात के सन्नाटे में मौका पाकर चारा खाकर पेट भर रहे हैं।
डीयर पार्क में वर्तमान में करीब 53 हरिण हैं। इन्हें पकड़कर कोटा के मुकुंदरा नेशनल पार्क छोडऩे की योजना है। इसके तहत पार्क के रेंजर जनक सिंह, वनपाल देवीशंकर पाठक सहित चार कर्मचारियों की टीम पिछले बीस दिन से डीयर पार्क में डेरा डाले हुए है।
इसके लिए एक पिंजरानुमा वाहन लाया गया है। हरिणों के चारा खाने के लिए तय स्थान पर गड्ढा खोदकर वाहन को खड़ा करने का प्रयास किया गया, ताकि हरिणों को आसानी से वाहन में भरकर कोटा ले जाया जा सके।
पकडऩे के लिए अमानवीय तरीका डीयर पार्क में हरिणों के चारा खाने व पानी पाने के लिए बनाए गए स्थान के चारों तरफ ग्रीन नेट का परकोटा बनाया गया है। इसे बिजली के तारों से जोड़ा गया है तथा सोलर बैट्री के 18 वॉट का करंट इन तारों में प्रवाहित किया जा रहा है।
हरिण जैसे ही इस ग्रीन नेट के परकोटे में आते हैं तो करंट का झटका लगने के साथ ही वह घबराकर बाहर नहीं भाग पाते। वन्य जीव सुरक्षा का दावा करने वाले वन विभाग की ओर से हरिणों को पकडऩे के लिए करंट प्रवाह करके पकड़े जाने के अमानवीय तराके से हरिणों की जान सांसत में है।
यही कारण है कि बीस दिन बाद भी एक भी हरिण पकड़ में नहीं आया है।चारा खाने का समय बदलावन विभाग की नर्सरी से मिली जानकारी को सही मानें तो लम्बे समय से सभी हरिणों को अपराह्न चार बजे चारा डाला जाता है।
समय होने के साथ ही सभी हरिण पार्क में पानी के टैंक के पास आ जाते थे। लेकिन करंट युक्त ग्रीन नेट लगाने के बाद से आज तक हरिण समय पर चारा खाने के लिए नहीं आ रहे हैं।
वे रात के सन्नाटे में मौका पाकर चारा खा रहे हैं। जयपुर से आए डॉक्टरआमतौर पर वन्य जीवों को पकड़कर अन्यत्र ले जाते समय बेहोश किया जाता है।
रेंजर सुधीर माथुर ने बताया कि इस प्रयास के लिए जयपुर से डॉक्टर भी बुलवाया गया था, लेकिन हरिणों के लिए यह हानिकारक है।
Published on:
10 Dec 2016 07:21 am
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