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Diwali Festival: अजमेर में महालक्ष्मीजी का मंदिर, फूल और इत्र चढ़ाते हैं भक्त

महालक्ष्मीजी की प्रतिमा के दायीं ओर कुबेर और बायीं ओर रिद्धी-सिद्धी के दाता गणेशजी विराजित हैं। साथ में विद्या की देवी सरस्वती भी विराजित हैं।

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Oldest and famous Mahalaxmi Temple in ajmer

Oldest and famous Mahalaxmi Temple in ajmer

आगरा गेट गणेश मंदिर स्थित लक्ष्मीजी के मंदिर की भी यही मान्यता है। समुद्र मंथन में प्रकट हुई महालक्ष्मी का यहां हूबहू विग्रह है। वे चारों हाथों से भक्तों को आशीर्वाद देती है। प्रत्येक शुक्रवार को मेला भरता है। दिवाली पूरी रात मंदिर खुला रहता है। यहां कई लोग इत्र और फूल चढ़ाते हैं। इसके पीछे बड़ी मान्यता है।

आगरा गेट पर धन और ऐश्वर्य की देवी वैभव महालक्ष्मी का मंदिर स्थित है। कपिल शर्मा ने बताया कि मंदिर मराठाकाल में बनाया गया है। मंदिर में 21 इंच के जोधपुरी लाल पत्थर को तराशकर चार भुजा वाली मूर्ति बनाई गई है। इसके दोनों तरफ हाथी ने सूंड में स्वर्ण कलश पकड़ रखे हैं। इन स्वर्ण कलश से लक्ष्मीजी का अभिषेक कर रहे हैं। महालक्ष्मीजी की प्रतिमा के दायीं ओर कुबेर और बायीं ओर रिद्धी-सिद्धी के दाता गणेशजी विराजित हैं। साथ में विद्या की देवी सरस्वती भी विराजित हैं।

पढ़ें यह खबर भी: खोबरानाथ भैरु की साल में एक दिन होती है पूजा

खोबरानाथ भैरू प्राचीन मंदिर का मेला 12 नवम्बर को भरेगा। मंदिर समिति अध्यक्ष अनिल नाग व सचिव अशोक माथुर ने बताया कि भगवान भैरू शादी देव के नाम से भी विख्यात है। यह मान्यता रही है जिस बच्चे की विवाह आदि में अर्चना आदि है भगवान भैरू की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेकर यह अड़चन तुरन्त दूर हो जाती है।खोबरानाथ भैरू अजमेर कायस्थ समाज के कुल देवता है और इनकी पूजा सामूहिक रूप से वर्ष में एक दिन की जाती है। कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर पूजा की मान्यता है कि भैरू भगवान शिव के अवतार है तथा माता लक्ष्मी के चौकीदार हैं। इसलिए प्रत्येक वर्ष की यानि दीवानी पर सुबह भगवान भैरू की पूजा कर इन्हे प्रसन्न कर समाज का हर व्यक्ति लक्ष्मी की पूजा अर्चना करता है।

ऐतिहासिक है मंदिर का महत्व

मुगल बादशाह शाहजहां व मराठा काल के शासकों की भक्ति मंदिर में रही। मराठा दरबार ने मंदिर के रखरखाव के लिए चल व अचल सम्पतियां मंदिर को दी है।यह मंदिर सर्वधर्म का प्रतीक रहा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजमेर से जारी एक ट्रस्ट की ओर से संचालित है। ट्रस्ट खोबरानाथ भैरू ट्रस्ट देवस्थान में पंजीकृत है। मंदिर के ट्रस्टी आदित्य नारायण माथुर, राकेश राजोरिया, राजेन्द्र कुमार, प्रेमनारायण माथुर मंदिर के मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेला 12 नवम्बर को सुबह 7 बजे से शुरू हो जाएगा।

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