
अजमेर . सरकारी नियंत्रण और फीस के मुद्दे पर महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्राओं की नाराजगी बुधवार को भी जारी रही। छह छात्राएं सुबह भूख हड़ताल पर बैठ गईं। शिक्षकों और पुलिस की समझाइश के बाद दोपहर बाद छात्राओं ने भूख हड़ताल खत्म की।
छात्राओं ने सुबह कक्षाओं का बहिष्कार कर कॉलेज के मुख्य द्वार पर कब्जा जमा लिया। छह छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठ गई। सूचना मिलने पर आदर्श नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शिक्षकों ने फ्रूटी और ज्यूस पिलाकर भूख हड़ताल तुड़वाने के प्रयास किए पर सफलता नहीं मिली। पुलिस ने मुख्य द्वार पर अनधिकृत कब्जे का मामला दर्ज करने की चेतावनी दी जो बेअसर रही। बाद में सीनियर छात्राओं ने अलग से वार्ता करने को लेकर सबको अलग बुलाया। इसके बाद छात्राओं ने भूख हड़ताल को खत्म कर दिया।
मंत्री यहीं आए बात करने...
समझाइश के लिए पहुंच शिक्षकों को छात्राओं ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से उन्हें फीस को लेकर आश्वासन मिल रहे हैं। सरकार को हमारी परवाह नहीं है। मंत्री को वहां से फीडबैक लेने की बजाय यहां आकर बातचीत करनी चाहिए। इस दौरान आम आदमी पार्टी की कीर्ति पाठक और कुछ कार्यकर्ता भी मौजूद रहीं।
किस नियम में होगी फीस कम!
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो सेल्फ फाइनेसिंग स्कीम में तय फीस को सरकारी में बदलना आसान नहीं है। अव्वल तो महिला इंजीनियरिंग कॉलेज स्वायत्तशासी समिति के अधीन संचालित है। सरकार को इसके नियंत्रण के साथ-साथ नियमित फीस लागू करने के लिए विधानसभा से नियम पारित कराना जरूरी होगा। उधर सेल्फ फाइनेंसिंग योजना किसी भी संस्थान की कमाई का सीधी जरिया भी है। ऐसे में मोटी आय को कोई भी हाथ से जाने नहीं देना चाहेगा।
कोई सीट सरकारी नहीं!
महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में कॉलेज में 2400 छात्राएं पढ़ती हैं। सरकारी कॉलेज में करीब 20 हजार रुपए फीस है। जबकि उन्हें 70 हजार रुपए कॉलेज फीस और 30 हजार से ज्यादा हॉस्टल फीस चुकानी पड़ रही है। उन्हें दूसरे शहरों से आने-जाने, किताबें और अन्य खर्चे भी करने पड़ते हैं। यहां कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एन्ड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और अन्य कोर्स संचालित हैं।
शिक्षकों को किया चिह्नित!
तकनीकी शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को चार दिन से हवा देने वाले कुछ शिक्षकों को चिह्नित किया है जिनके खिलाफ कार्रवाई होने के आसार हैं। संयुक्त सचिव पुष्पा सत्यानी ने पूरी रिपोर्ट तैयार की है। वे तकनीकी शिक्षा मंत्री माहेश्वरी को इससे अवगत कराया है। बॉयज कॉलेज में भी मंगलवार को हुए घटनाक्रम की जानकारी विभाग तक पहुंच गई है।
बगैर प्राचार्य का कॉलेज
चार दिन बाद भी प्राचार्य प्रो. रंजन माहेश्वरी के इस्तीफे पर भी कोई फैसला नहीं हुआ है। कॉलेज बिना प्राचार्य के संचालित है। हैरत की बात है, कि तकनीकी शिक्षा विभाग ने किसी शिक्षक अथवा दूसरे कॉलेज के प्राचार्य को कार्यभार सौंपना अथवा प्रो. माहेश्वरी को अग्रिम आदेश तक कामकाज करने का निर्देश देना उचित नहीं समझा है।
Published on:
22 Feb 2018 08:22 am
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