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Environment Day: अजमेराइट्स ने चलाई साइकिल, लगाए हरे-भरे पौधे

आरएसी के आईजी रूपिंदर सिंघ भी साइकिल लेकर शामिल हुए। उनके साथ लोगों ने जयकारे लगाते हुए साइकिल चलाई।

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अजमेराइट्स ने चलाई साइकिल, लगाए हरे-भरे पौधे

अजमेर विश्व पर्यावरण दिवस पर सोमवार को शहर में कार्यक्रम हुए। साइकिल रैली के अलावा आमजन ने अधिकाधिक पौधरोपण करने, प्रदूषण घटाने और स्वच्छता का संकल्प लिया। कई जगह प्रतियोगिताएं हुई।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव वरदान भवन द्वारका नगर गली नंबर चार में सुबह 8 बजे पौधे वितरित किए गए। केंद्र संचालिका बी.के. रूपा और अन्य मौजूद रहे। शास्त्री नगर सेवा केंद्र पर जागरुकता रैली निकाली। आनासागर चौपाटी के किनारे पौधे लगाए गए। लोगों ने पौधे लगाकर उन्हें पालने का संकल्प लिया। आरएसी के आईजी रूपिंदर सिंघ भी साइकिल लेकर शामिल हुए। उनके साथ लोगों ने जयकारे लगाते हुए साइकिल चलाई।

अजमेर में है बोन्साई का घरौंदा, हरियाली संग पर्यावरण संरक्षण

रक्तिम तिवारी. जयपुर रोड-घूघरा घाटी पर रहने वाले सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के बॉटनी विभाग के शिक्षाविद ने घर को ही गार्डन बना दिया है। इस गार्डन में उन्होंने बोनसाई सहित एक हजार से अधिक प्लांट लगा रखे हैं। बोन्साई के पौधे 1 से 34 साल तक पुराने हैं।

गर्मी में भी पंखे से चलता है काम

प्रो. मनोज यादव ने बताया कि उनके घर में एसी व कूलर हैं, लेकिन इन्हें चलाने की जरूरत कम पड़ती है। कई बार पंखे से ही काम चल जाता है। ज्यादा गर्मी पड़ने पर ही ऐसी चलाते हैं जिसका तापमान भी 30 डिग्री ही रखते हैं।

दो घंटे पौधों के नाम

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए उनका घर अपने आप में मिसाल है। पेड़-पौधे होने के कारण गर्मी में भी राहत मिलती है। उनका घर हर समय ठंडा बना रहता है। उन्होंने बताया कि पौधों की देखभाल के लिए दो घंटे और शाम को एक घंटे का समय देना पड़ता है। शाखाओं को काटकर इन्हें शेप देना, नियमित अंतराल में गमलों की मिट्टी बदलना, दवाओं का छिड़काव, खाद देना, निराई-गुड़ाई शामिल है।

 

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बोन्साई पौधों का महत्व

प्रो. यादव के अनुसार बोन्साई पौधे घरों और कार्यस्थलों के लिए बेहतरीन इनडोर प्लांट है। यह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लाभ भी प्रदान करते हैं। बोन्साई पौधों की खेती और देखभाल जापान और चीन में एक हजार से अधिक वर्षों से की जाती रही है। बोन्साई के लिए अनार, आम, बरगद, चीकू, चीड़, गूलड़, पीपल, संतरा, नींबू और बोगनवेलिया के पौधे बेहतर माने जाते हैं। बॉटनी पढ़ाते वक्त वह विद्यार्थियों को बोन्साई के पौधे तैयार करने की विधि समझाते हैं।