27 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बातें करते हैं आसमान छूने की, जमीन का नहीं अता-पता

कौशल विकास, वैश्विक मांग, तकनीकी नवाचार जैसे बिन्दुओं का समावेश करना जरूरी है।

2 min read
Google source verification
experts in committee

experts in committee

अजमेर.

कौशल विकास में कॉलेज और विश्वविद्यालय अब तक पिछड़े हुए हैं। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में कौशल विकास को जोडऩे, समितियों में विविध क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति और इनके नियमित मूल्यांकन को संस्थाएं तरजीह नहीं दे रही। ऐसा तब है जबकि यूजीसी क्षैक्षिक नवाचार की पक्षधर है।

केंद्रीय, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित कई कॉलेज में विज्ञान, वाणिज्य, कला, सामाजिक विज्ञान, चिकित्सा, तकनीकी और अन्य संकाय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित है। कई पाठ्यक्रमो में घिसे-पिटे बिन्दु पढ़ाए जा रहे है। यूजीसी ऐसे पाठ्यक्रमों में बदलाव करना चाहती है। उसका मानना है, कि पाठ्यक्रमों में नवाचार और अध्ययन-अध्यापन में तकनीकी इस्तेमाल जरूरी है।

पाठ्यक्रम समितियों में सिर्फ शिक्षक

यूजीसी का मानना है, कि सभी संकायों में औद्योगिक आवश्यकता, कौशल विकास, वैश्विक मांग, तकनीकी नवाचार जैसे बिन्दुओं का समावेश करना जरूरी है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों को कई बार पाठ्यचर्या समिति (बोर्ड ऑफ स्टडीज) में विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करने को कहा है। इसके बावजूद समितियां सिर्फ शिक्षकों तक सिमटी हुई है। विद्यार्थियों, सामाजिक-औद्योगिक संस्थाओं, अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों-विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया है।

सिमटा हुआ है दायरा
मौजूदा वक्त ज्यादातर कॉलेज और विश्वविद्यालयों में संकायवार शिक्षक ही स्नातक और स्नातकोत्तर विषयों के पाठ्यक्रम तैयार करते हैं। पाठ्यक्रमों का वृहद स्तर पर मूल्यांकन और नवाचार के अभाव से विद्यार्थियों को खास फायदा नहीं मिल रहा। कॉलेज में व्यावसायिक और कौशल पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं, पर इनकी संख्या बहुत कम है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने वर्ष 2017 में पाठ्यक्रम समितियों में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों-विद्यार्थियों को शामिल करने की बात कही थी। मामला दो साल से आगे नहीं बढ़ पाया है।

वरना ये मिले फायदा

-पाठ्यक्रमों में प्रत्येक पहलुओं पर चर्चा
-सभी संकायों के पाठ्यक्रमों का नियमित मूल्यांकन

-सामाजिक-औद्योगिक संस्थाओं के अनुभव का लाभ
-आद्यौगिक मांग के अनुसार बन सकेंगे पाठ्यक्रम

-विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्ति में सहूलियत

फैक्ट फाइल
देश में केंद्रीय विश्वविद्यालय-47

राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय-350
डीम्ड विश्वविद्यालय-130

निजी विश्वविद्यालय-250
राज्यवार पंृजीकृत कॉलेज-700

(स्त्रोत: यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची)