भिनाय (अजमेर). अजमेर जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर स्थित भिनाय गांव की ऐतिहासिक कोड़ामार होली प्रसिद्ध है। बगड़ावतों की धरां के रूप में पहचान बनाने वाले भिनाय में होली का उत्सव खास होता है। गांव को दो हिस्सों में बांटने वाले बाजार के मापा (तिराहे) पर यह कोड़ामार दंगल होता है। इसे देखने के लिए अजमेर सहित अन्य जिलों से लोग देखने पहुंचने हैं।
होली के पारंपरिक त्योहार पर होलिका दहन के दूसरे दिन सुबह रंग-गुलाल खेलने के बाद शाम को मुख्य बाजार में कोड़ामार दंगल होता है। इसमें रस्से से बने कोड़ों को तैयार कर दिनभर पानी में भिगोया जाता है। पानी से निकालने के बाद लाठी की तरह तैयार हुए कोड़ों को लेकर लोग सिर पर साफा बांधकर मुख्य बाजार में एक-दूसरे के सामने खड़े हो जाते हैं और एक दूसरे पर कोड़े बरसाते हैं। निर्धारित जगह से मारते हुए धकेलने पर संबंधित पक्ष जीतता है। एक पक्ष चौक तो दूसरा पक्ष कावडिय़ा दल होता है। एक दूसरे को दुश्मन मानते हुए लड़ते हैं और खेल के बाद आपस में प्रेम व सौहार्द के साथ मिलते हैं और भाईचारे के साथ मेल-मिलाप करते हैं। यहीं खेल होली के तीसरे दिन शाम को भी खेला जाता है। बुजुर्गों के अनुसार गांव में बरसों पूर्व राजा-रानी के अलग-अलग दल के रूप में यह दंगल होता था। एक पक्ष में राजा व दूसरे पक्ष में रानी होती थी। बरसों से यह परंपरा आज भी कायम है। यह खेल पीढ़ीदर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है। इसकी व्यवस्था के लिए ना तो पुलिस होती है ना प्रशासन। गांव के ही इस खेल के पुराने खिलाड़ी इस खेल की व्यवस्था करवाते हैं। खेल के बाद गुड़ आदि बांटा जाता है। इस खेल को हिन्दू-मुस्लिम साथ-साथ भी खेलते हैं।
…………………… खेल शुरू होने से पूर्व भैरूजी की स्थापना कर ज्योत की जाती है। ढोल की थोप, बांकिए की धुनों पर दोनों दलों का उत्साह व जोश बढ़ाया जाता है। एक दूसरे को ललकारते हुए खेल शुरू होता है। कोड़े के प्रहार को देख दर्शक जोशीले नारे लगाते हैं।