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अनुसंधान, तकनीक और उद्योग के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : चौधरी

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान तबीजी में इंडस्ट्री मीट व किसान मेला, देशभर के वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और किसान हुए शामिल

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अजमेर

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dinesh sharma

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दिनेश कुमार शर्मा

Mar 07, 2026

National Seed Spices Research Institute

अजमेर. राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान तबीजी में बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन करते अति​थि।

अजमेर (Ajmer news) . केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि बीजीय मसालों के क्षेत्र में अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और उद्योगों के सहयोग से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों के बीच समन्वय मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि नई तकनीकें तेजी से खेतों तक पहुंच सकें। चौधरी शनिवार को केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान तबीजी में आयोजित इंडस्ट्री मीट व किसान मेला को संबोधित कर रहे थे।

भारत प्राचीनकाल से मसालों की भूमि

उन्होंने कहा कि भारत प्राचीनकाल से मसालों की भूमि रहा है। भारतीय मसालों की गुणवत्ता व सुगंध की विश्वभर में पहचान है। जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी और अजवाइन जैसे बीजीय मसाले किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश के निर्यात को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सहित पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में बीजीय मसालों की खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन चुकी है।

आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाएं

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों को उन्नत बीजों और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए, जिससे कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

नागौरी पान मेथी को अनुसंधान सूची में करेंगे शामिल

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने कहा कि किसान अनुसंधान के लिए आवश्यक विषयों की जानकारी दें, ताकि आवश्यकता आधारित शोध को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बताया कि नागौरी पान मेथी को भी स्थानीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र की अनुसंधान सूची में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थानी सूखी लाल मिर्च पर भी शोध किए जाएंगे। उन्होंने जीरा में प्रसंस्करण सुविधा विकसित करने तथा धनिया बीज के लिए कोटा को हब बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की जरूरत 

स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान ने अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उद्योगों को किसानों से सीधे जोड़कर उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप नई फसलों के विकास को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जे. पी. मिश्रा ने बताया कि जोधपुर क्षेत्र में जीरा उत्पादन के लिए क्लस्टर बनाकर नई किस्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। डॉ. आर. जी. अग्रवाल ने कहा कि लघु और सीमांत किसानों तक भी नवीन शोध और तकनीक पहुंचनी चाहिए तथा फसल विविधता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री चौधरी ने बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया तथा तकनीकी पुस्तिकाओं का विमोचन और बीज पैकेटों का वितरण किया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया गया। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने किया। प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एस. एस. मीणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में देशभर से आए वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसानों ने भागीदारी निभाई।