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फायर सेस की दरें घटाईं, पांच साल में कराना होगा नवीनीकरण

– राजस्थान बजट में उद्योगों को दी राहत – अब तक रीको भी वसूल रहा था फायर चार्जेज अजमेर. प्रदेश में अब उद्योगों को फायर सेस की दरों से काफी राहत मिलेगी। करीब चार वर्ष पूर्व तत्कालीन कांग्रेस शासन में सभी उद्योगों को फायर सेस की भारी भरकम राशि अदा करनी थी जो 50 रुपए प्रति […]

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अजमेर

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Dilip Sharma

Aug 04, 2024

fire ses

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- राजस्थान बजट में उद्योगों को दी राहत

- अब तक रीको भी वसूल रहा था फायर चार्जेज

अजमेर. प्रदेश में अब उद्योगों को फायर सेस की दरों से काफी राहत मिलेगी। करीब चार वर्ष पूर्व तत्कालीन कांग्रेस शासन में सभी उद्योगों को फायर सेस की भारी भरकम राशि अदा करनी थी जो 50 रुपए प्रति वर्ग मीटर से लेकर 200 रुपए तक थी। इस पर भी फायर सेस का नवीनीकरण प्रतिवर्ष करना था। अब सरकार ने बजट में उद्योगों को भारी राहत देते हुए फायर सेस की दर घटाकर 15 रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दी है।नवीनीकरण अवधि भी प्रतिवर्ष से बढ़ा प्रति पांच वर्ष कर दी है। अजमेर सहित प्रदेश के सभी उद्यमियों ने इससे राहत की सांस ली है।

लघु उद्योग भारती की मांग पूर्ण

अजमेर लघु उद्योग भारती ने सेस की दरों व नियमों पर पुनर्विचार करने की मुख्यमंत्री से मांग की थी।भजन लाल सरकार ने बजट में इस शुल्क को घटाकर जोखिम श्रेणी के वर्गीकरण से भी इसे मुक्त कर दिया।

अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश में अधिक दरें

पड़ोसी राज्य गुजरात व पंजाब में राजस्थान से बेहतर औद्योगिक विकास हुआ। राज्य में अग्नि शमन व्यवस्थाओं के दुरुस्तीकरण के लिए एक कर प्रणाली फायर सेस के नाम से शुरू की वह उद्योग आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगे।

एक ही विषय पर दो शुल्क वसूली

भारत के फैक्ट्री एक्ट 1948 में अग्नि दुर्घटना से बचाव के लिए उद्योगों पर पहले से प्रावधान लागू किए हैं। एक्ट में अध्याय 4 की धारा 38 में उद्योगों में फायर सेफ्टी विषय में नियमों का निर्धारण किया जा चुका है। जिसे उद्योगपति मानते चले आए हैं। अब फायर सेस के नाम पर अलग से राशि भुगतान किए जाने को लेकर उद्यमियों ने विरोध जताया। इससे एक ही विषय पर दो दो विभाग उद्यमियों से राशि वसूल रहे थे।

रीको भी फायर चार्जेज वसूल रहा

रीको प्रति वर्ष वसूले जाने वाले सर्विस चार्ज में फायर स्टेशन चार्ज वसूलती ही है। ऐसे में स्थानीय निकायों की ओर से अलग से सेस वसूलना दोहरे करारोपण की स्थिति बना रहा था। इसे लेकर भी उद्यमियों में विरोध था।

इनका कहना है

फायर सेस के नाम पर लाखों रुपए प्रतिवर्ष आर्थिक बोझ उद्यमी पर पड़ रहा था। प्रतिवर्ष प्रीमियम के रूप में फायर सेस देना पड़ रहा था। अब दरें भी कम हुई व पांच वर्ष में नवीनीकरण कराना होगा। इससे खासी राहत मिलेगी।

कुणाल जैन, अध्यक्ष लघु भारती संघ, अजमेर।

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पूर्व में सेस की दरें यह थीं

बिल्ट अप एरिया जोखिमपूर्ण उद्यम जोखिम पूर्ण और 60 मीटर ऊंचे इससे अधिक ऊंचे

1000 50 हजार 1.50 लाख 2.0 लाख

2000 एक लाख तीन लाख 4.0 लाख

5000                         2.50 लाख                        7.50 लाख                         10.00 लाख

10000                         5 लाख                         15 लाख                         20.00 लाख्