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Flash Back: 75 की बाढ़…के नाम से जानी जाती है वो बरसात…

एक दिन में अजमेर में करीब 750 मिलीमीटर से ज्यादा बरसात ने जबरदस्त तबाही मचाई थी।

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1975 flood in ajmer

1975 flood in ajmer

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

अजमेर के इतिहास में 18 जुलाई 1975 कभी ना भुलाने वाला दिन है। ताबड़तोड़ बरसात के नजारे को उस वक्त की पीढ़ी कभी नहीं भुला सकती है। एक दिन में अजमेर में करीब 750 मिलीमीटर से ज्यादा बरसात ने जबरदस्त तबाही मचाई थी।

45 साल पहले अजमेर शहर का दायरा नया बाजार-पुरानी मंडी,दरगाह बाजार, मदार गेट सहित परकोटे के अंदर ज्यादा सिमटा हुआ था। बाहरी इलाकों में क्रिश्चियनगंज, राजा साइकिल, सिविल लाइंस, शास्त्री नगर, रेलवे क्वाटर, लिंक रोड, फायसागर रोड, वैशाली नगर-बधिर विद्यालय और अन्य कॉलोनी थी।

वो ताबड़तोड़ बरसात
18 जुलाई 1975 को सुबह 6-7 बजे से ताबड़तोड़ बरसात का दौर शुरू हुआ। लगातार 8 से 10 घंटे तक झमाझम बरसात चली। शहर के अंदरूनी और बाहरी इलाकों में पानी का सैलाब उफ पड़ा था। बाहरी इलाकों में आनासागर का पानी बहुत बड़े क्षेत्र (करीब 25 से 26 फीट) में भर गया था। कई इलाकों में घरों में महीनों तक पानी भरा रहा था। वैशाली नगर-जनता कॉलोनी में बने हाउसिंग बोर्ड के मकान महीनों तक खाली रहे थे।

अब कुछ घंटे की बरसात में यह हाल
अजमेर में 29 सितंबर 2013 को 120.6, 1 अगस्त 2019 को 114.2 और 19 मई 2021 को 114.3 ताबड़तोड़ बरसात हुई थी। यह बरसात महज पांच-छह घंटे की थी। लेकिन इससे शहर के कई इलाके पानी में घिरने से टापू बन गए थे। वैशाली नगर सेक्टर-तीन, गुलमोहर कॉलोनी, सागर विहार कॉलोनी, जादूघर, नगरा, अलवर गेट और आसपास के इलाकों में हालात खराब थे। नगर निगम और एडीए को कई दिन तक पम्प लगाकर पानी निकालना पड़ा था।

मच सकती है तबाही...
1975 की तरह कभी अजमेर में पानी बरसा तो ज्यादा तबाही मच सकती है। अव्वल तो जल निकासी के प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण हो चुके हैं। आंतेड़, नागफणी, तारागढ़-अंदरकोट क्षेत्र, शास्त्री नगर समेत कई जगह पहाड़ों पर मकान बन चुके हैं। सीवरेज लाइन थोड़ी सी बरसात में उफन पड़ती हैं। स्टेशन रोड, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, वैशाली नगर, सावित्री चौराहा, महावीर सर्किल सहित कई इलाकों में तरणताल बन जाते हैं। जल निकासी के उचित प्रबंध नहीं हैं।