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स्टूडेंट्स से मजाक, ना विश्वविद्यालय ना कॉलेज में खेल सुविधाएं

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 25 Feb 2019, 6:33 AM IST

games and sports facility

games and sports facility

अजमेर.

अगर शहरवासी और विद्यार्थी महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, लॉ और बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में क्रिकेट और फुटबॉल खेलना चाहें तो उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी। इनके परिसरों में कोई खेल मैदान नहीं है। युवाओं के लिए इंडोर और आउटडोर गेम्स सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसा तब है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार खेल सुविधाएं मुहैया कराने में पीछे नहीं है।

विश्वविद्यालय के पास कायड़ रोड पर करीब 700 बीघा जमीन है। इसके कुछ हिस्सों में शैक्षिक प्रशासनिक भवन, छात्रावास और स्टाफ-टीचर्स क्वाटर बने हैं। जबकि कई हिस्से खाली पड़े हैं। खेल सुविधाओं के मामले में विश्वविद्यालय के हाल खराब हैं। यहां पढऩे वाले अथवा सम्बद्ध कॉलेज के विद्यार्थी क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल जैसे आउटडोर और बैडमिंटन, स्क्वैश, टेबल टेनिस, टेनिस और अन्य इंडोर गेम्स खेलना चाहें तो उन्हें निराशा हाथ लगेगी।

कॉलेज के हाल भी खराब
बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में भी क्रिकेट, फुटबॉल खेलने के लिए मैदान नहीं है। ऐसा तब है जबकि कॉलेज में करीब 1 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां प्रतिवर्ष वार्षिक खेल प्रतियोगिताएं होती हैं। इनका आयोजन लोको स्पोट्र्स ग्राउन्ड या अन्यत्र कराना पड़ता है। यहां भी स्क्वैश, टेबल टेनिस, टेनिस और अन्य इंडोर गेम्स खेलने की सुविधाओं का अभाव है। यही हाल लॉ कॉलेज का है। इसके कायड़ रोड स्थित भवन में खेल मैदान, प्रशिक्षक और संसाधन तक नहीं है।

शुल्क वसूली में आगे
खेलों के विकास के लिए विश्वविद्यालय विद्यार्थियों से सौ रुपए खेल शुल्क वसूलता है। लेकिन परिसर में खेल सुविधाओं के विस्तार-विकास नजर नहीं आता। फ्रांस के रॉला गैरां की तर्ज पर निर्मित लाल बजरी का टेनिस कोर्ट बर्बाद हो चुका है। यहां बच्चे और नौजवान अब क्रिकेट खेलते हैं।

कब बनेगा तेंदुलकर स्टेडियम
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने पिछले कांग्रेस राज में सचिन तेंदुलकर स्टेडियम का शिलान्यास किया था। पिछले नौ साल से यहां एक ईंट नहीं लग पाई है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत 1 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है।

यह कैसा हॉकी मैदान
विश्वविद्यालय ने हॉकी मैदान के नाम पर युवाओं और शहरवासियों को बड़ी सफाई से धोखा दिया है। स्टाफ कॉलोनी परिसर में टेनिस कोर्ट के पास ही हॉकी मैदान का बोर्ड टांग दिया है। यहां कभी ना किसी को हॉकी खेलते देखा गया। ना ही हॉकी के लिए गोल पोस्ट लगाए गए हैं।

कोच नहीं, कौन तराशे खिलाडिय़ों को
विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज और लॉ कॉलेज में खेल प्रशिक्षक अथवा खेल निदेशक नहीं है। विश्वविद्यालय में पूर्व में भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच यहां सेवाएं देते थे, लेकिन अब यह सिलसिला बंद हो चुका है। लॉ कॉलेज में तो पद ही सृजित नही है। इंजीनियिरंग कॉलेज में भी यही हाल है। मालूम हो कि 80 प्रतिशत सरकारी और निजी कॉलेज बगैर खेल प्रशिक्षकों के संचालित हैं। सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय जैसे कुछेक कॉलेज को छोडकऱ कहीं शारीरिक शिक्षा विभाग नहीं नहीं है।