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Good News: शोकलिया में बनेगा खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व, बढ़ेगा टूरिज्म

कंजर्वेशन रिजर्व बनने के बाद यहां वन्य जीव अधिनियम लागू होगा। संरक्षित क्षेत्र को लेकर वन विभाग सर्वेक्षण रिपोर्ट बनाएगा।

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शोकलिया में बनेगा खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व, बढ़ेगा टूरिज्म

शोकलिया में बनेगा खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व, बढ़ेगा टूरिज्म

रक्तिम तिवारी

जिले में खरमोर के पसंदीदा क्षेत्र शोकलिया का जल्द कायाकल्प होगा। यहां खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व बनाया जाएगा। इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं। संरक्षित क्षेत्र बनने से खरमोर की आबादी के साथ-साथ जैव विविधता और पर्यटन भी बढ़ेगा।

अजमेर जिले में शोकलिया, गोयला, रामसर, मांगलियावास और केकड़ी खरमोर के पसंदीदा क्षेत्र हैं। मूलत: प्रवासी पक्षी कहा जाने वाला खरमोर इन्हीं इलाकों के हरे घास के मैदान, झाडिय़ों युक्त ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र में दिखता रहा है। खासतौर पर जुलाई से सितंबर में बरसात के दौरान यह अक्सर नजर आते हैं, पर बाद में दिखाई नहीं देते हैं।

टोंक के गोगेलाव में चिंकारा और काले हिरण के संरक्षण के लिए कंजर्वेशन रिजर्व बनाया गया है। इसी तर्ज पर शोकलिया-गोयला-रामसर क्षेत्र में खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय और राज्य वन एवं पर्यावरण मंत्रालय योजना बनाने में जुटे हैं। कंजर्वेशन रिजर्व बनने के बाद यहां वन्य जीव अधिनियम लागू होगा। संरक्षित क्षेत्र को लेकर वन विभाग सर्वेक्षण रिपोर्ट बनाएगा।

कराया था इनक्यूबेटर में निशेचन

साल 2020 में पर्यावरण मंत्रालय, विश्व वन्य जीव संगठन और भारतीय वन्य जीव संस्थान के प्रयासों से पहली बार इनक्यूबेटर में खरमोर के अंडों का निशेचन कराकर दो चूजों की ब्रीडिंग कराई गई थी। इनसे दो चूजे निकले थे। इनके लिए प्राकृतिक भोजन की व्यवस्था की गई। बाद में इन्हें वन क्षेत्र में छोड़ा गया था।

खरमोर की स्थिति चिंताजनक

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के पूर्व पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण माथुर ने बताया कि पूरी दुनिया में खरमोर का अस्तित्व संकट में है। अजमेर-शोकलिया-भिनाय क्षेत्र में झाडिय़ों और घास के मैदान खरमोर के लिए अहम हैं। दुर्भाग्य से इसके आवास स्थल घटते जा रहे हैं।

कंजर्वेशन रिजर्व से फायदे

- खरमौर को मिलेगा प्राकृतिक आवास-भोजन

- संरक्षित क्षेत्र होने से मानवीय हलचल होगी कम

- खरमोर की प्रजाति को बढ़ाने में मिलेगी मदद

- खरमोर के अनुकूल बढ़ेगी जैव विविधता

- कृत्रिम वातावरण और उचित तापमान में निशेचन संभव

- देश और दुनिया में खरमोर पर शोध के खुलेंगे नए मार्ग

- जिले में बढ़ेगा खरमोर आधारित पर्यटन

फैक्ट फाइल

- खरमोर है अजमेर जिले का शुभंकर पक्षी

- 4374 खरमोर थे जिले में 1980 के दशक तक

- 2 हजार के आस-पास राज्य में रह गए हैं खरमोर

- 2020 में पहली बार नजर आए थे पांच खरमोर

- 5 साल से शोध कर रही भारतीय वन्य जीव संस्थान की टीम

शोकलिया में खरमोर कंजर्वेशन रिजर्व बनाने की योजना है। इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर प्रस्ताव बनाया जा रहा है। कंजर्वेशन रिजर्व बनने से खरमोर पक्षी का बेहतर संरक्षण होगा।

- विजय. एन, सीसीएफ, अजमेर मंडल

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