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राजभवन के इस लेटर ने मचाई हलचल, टैंशन में आए सभी विश्वविद्यालयोंके कुलपति

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 20 Jul 2018, 6:33 AM IST

governor house

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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

गुणवत्ता पूर्ण शोध और ऊर्जा के गैर पारम्परिक स्त्रोत बढ़ाने में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की रुचि नहीं है। इसके चलते ही नैक ग्रेडिंग में उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। ऐसा हम नहीं बल्कि राजभवन सचिवालय से जारी पत्र बता रहा है। विश्वविद्यालयों के कामकाज से कुलाधिपति बहुत ज्यादा खुश नहीं है। राजभवन ने विश्वविद्यालयों में काफी सुधार की जरूरत बताई है। राज्यपाल के सचिव देबाशीष पृष्टी ने हाल में एक पत्र जारी किया है। इसे सही मायनों में विश्वविद्यालयों का रिपोर्ट कार्ड माना जा सकता है। सचिव ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक उत्तरदायित्व के अलावा सामाजिक सरोकार और कई अहम कार्यों में काफी पिछड़ा बताया है।

नहीं हो रहा गुणवत्तापूर्ण शोध
पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों की पहचान उत्कृष्ट शोध से होती है। इसमें गुणवत्तापूर्ण शोध सबसे अहम है, जो देश-प्रदेश और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों शोध गुणवत्तापूर्ण नहीं हो रहा। नैक की ग्रेडिं में विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति इसका परिचायक है। सभी विश्वविद्यालयों को शोध में सुधार लाने की जरूत है। ताकि विद्यार्थी, शिक्षक, विभाग, संस्थाओं और आमजन तक उनका फायदा पहुंचे।

नहीं हो रहा बरसाती पानी का संग्रहण

केंद्र और राज्य सरकार ने सभी सरकारी अैार निजी विभागों, आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों को बरसात के पानी को संग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। कई सरकारी और निजी महकमों और घरों में इसकी शुरुआत हो भी गई है। फिर भी यह इनकी संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक ही हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय सहित कई संस्थाओं में बरसात के पानी का संग्रहण नहीं हो रहा है। राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों से इसकी रिपोर्ट मांगी है।

सौर-पवन ऊर्जा का नहीं उपयोग

गैर पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कुलपति समन्वय समिति में फैसला हुआ था। विश्वविद्यालयों में सौर ऊर्जा पैनल, पवन चक्की लगाई जानी थी। पत्र में कहा गया है, कि कुछेक को छोड़कर अधिकांश विश्वविद्यालय उदासीन हैं। इनका कार्य संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। मालूम हो कि विश्वविद्यालयों में लाखों रुपए के बिजली आ रहे हैं। किसी विभाग-दफ्तर में आठ से दस लाइट एकसाथ जलाकर कामकाज किया जाता है।

रेन हार्वेस्टिंग में कई संस्थाएं पीछे

शहर के 60 प्रतिशत सरकारी महकमों, निजी प्रतिष्ठानों, स्कूल-कॉलेज और अन्य संस्थाओं में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं है। यही वजह है, कि बरसात के दौरान हजारों लीटर पानी बेकार ही बह जाता है। नला बाजार, कचहरी रोड, मदार गेट, महावीर सर्किल, वैशाली नगर, सावित्री स्कूल चौराहा, जयपुर रोड, मार्टिंडल ब्रिज, तोपदड़ा और आगरा गेट में पानी का भराव सर्वाधिक होता है। बरसात के रूप में जिले में करीब 5,550 एमसीएफटी पानी गिरता है। इसमें से ढाई हजार एमसीएफटी पानी ही झीलों-तालाबों अथवा भूमिगत टैंक तक पहुंचता है। बाकी पानी व्यर्थ बह जाता है। अलबत्ता प्रादेशिक परिवहन विभाग, लॉ कॉलेज और कुछ संस्थाओं ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की है।