
अजमेर/मागंलियावास। मांगलियावास कल्पवृक्ष मंदिर के मेला मैदान पर भरने वाला हरियाली अमावस्या के मेले को लेकर मेला ग्राउंड में झूले वालों ने आकर डेरा डाल लिया है। इस बार बारिश अच्छी होने के कारण मेले में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने का आकलन लगाया जा रहा है। फिलहाल मेला ग्राउंड पर झूले पहुंच गए हैं। लेकिन पंचायत प्रशासन द्वारा अभी साफ-सफाई सहित अन्य तैयारियां नहीं की।
समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक
मांगलियावास के नर-नारी कल्पवृक्ष विश्वविख्यात हैं। श्रावण मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मांगलियावास में हरियाली अमावस्या के दिन मेला लगता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है। यह मेला 800 साल से मांगलियावास में लग रहा है। पौराणिक धर्म ग्रन्थों एवं हिन्दू मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नो में से एक कल्पवृक्ष भी था। कल्पवृक्ष के विषय में यह भी कहा जाता है कि इसका अंत कल्पान्त तक नहीं होता है।
श्रद्धा का बड़ा स्थान
मान्यतानुसार साधु मंगलसिंह अपने शिष्य फतेहसिंह के साथ यहां पर एक डेरे में थे। तभी उन्होंने एक जति को आकाश मार्ग से कल्पवृक्ष को ले जाते देखा तो उतरवा लिया। कालान्तर में साधु मंगलसिंह के नाम पर इस स्थान का नाम मांगलियावास पड़ गया। मेले में ब्यावर, अजमेर, बिजयनगर, किशनगढ़, पुष्कर, केकड़ी, मसूदा आदि स्थानों के लोग बड़ी संख्या में मेले में शामिल होते हैं। राजस्थान के अतिरिक्त अन्य राज्यों के लोगों के लिए भी यह एक बड़ा श्रद्धा स्थल है।
Published on:
30 Jun 2023 06:08 pm

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