
अजमेर. सूदखोरी की अमरबेल अजमेर की गलियों में भी फैली है। शहर की कच्ची बस्ती के अलावा रेलवे कर्मचारियों का बड़ा वर्ग शहर के सूदखोर के चंगुल में फंसा हुआ है। नतीजतन कई बार कर्ज तले दबे युवा सूदखोर से मुक्ति पाने के लिए फांसी के फंदे या आनासागर झील को अंतिम राह चुनते हैं। हालांकि कई मामले में सुसाइट नोट मिलने पर पुलिस इन सूदखोर पर शिकंजा सकती है, लेकिन अधिकांश मामले में सबूत नहीं होने के कारण आरोपित बच निकलते हैं।
दो साल पहले अलवर गेट इलाके में रहने वाला युवक पुष्कर सरोवर में कूद गया। उसे मौके पर मौजूद लोगों ने बचा लिया, लेकिन जेब से मिले सुसाइट नोट ने सारी कहानी बयां कर दी। सूदखोरों के चंगुल में फंसे युवक, उसके परिजन ने पुलिस को बताया कि ब्याज पर पैसा लेने के बाद वह लगातार ब्याज के साथ मूल की अदायगी करते रहे, लेकिन सूदखोर का कर्ज खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। घर आकर आए दिन बेइज्जत करने से परेशान युवक ने आखिर सरोवर में कूदकर जान देने का प्रयास किया।
सर्वाधिक मामले यहां
सूदखोरी का काला कारोबार सर्वाधिक अलवर गेट, रामगंज क्षेत्र में फल फूल रहा है। सूदखोर मजबूरी का फायदा उठाते हुए जरूरतमंद से 5 से 10 रुपए सैकड़ा तक का ब्याज वसूल रहे हैं। महीने की दस तारीख को रेलवे कारखाने के बाहर और आस-पास सूदखोर देखे जा सकते हैं। वहीं शहर के अधिकांश चौराहे व चाय की थड़ी इनका अड्डा हैं।
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वर्षा यज्ञ का आयोजन
अजमेर. आर्य समाज नया बाजार पुरानी मंडी की ओर से आर्य विहार में वर्षा यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें चित्तौड़ गुरुकुल के स्नातक रामदेव आर्य के सानिध्य में यजुर्वेद के मंत्रों के साथ यज्ञ में आहुतियां दी गईं और सृष्टि के कल्याण के लिए अच्छी वर्षा की कामना की गई। यज्ञ के ब्रह्मा सत्यनारायण शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया। आर्य समाज के मंत्री गोविंद शर्मा ने अच्छी बरसात की कामना करते हुए सबसे पौधरोपण का आह्वान किया। इस दौरान गणेश वैष्णव, धर्मेन्द्र आर्य, घनश्याम शर्मा, आकांक्षा आर्य, बाबूलाल आदि मौजूद थे।
Published on:
25 Jun 2018, 2:39 PM IST
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