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कैसे हो रोडवेज का बेड़ा पार. .अब नई सरकार का इंतजार

- पचास फीसदी खटारा गाडि़यां सड़कों पर, घाटे से जूझ रहा निगम -1600 तक सिमट गईं 4500 बसें, स्टाफ-संसाधनों का टोटा आम जनता के लिए प्रदेश में परिवहन का सुगम साधन रोडवेज संचालित करने वाला राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम गत दस सालों से निरंतर बसों व स्टाफ सहित अन्य जरूरी संसाधनों की कमी के चलते घाटे के साथ ही बदहाली से जूझ रहा है।

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अजमेर

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Dilip Sharma

Dec 10, 2023

दिवाली से पहले रोडवेज कार्मिकों-पेंशनर्स को तोहफ़ा

दिवाली से पहले रोडवेज कार्मिकों-पेंशनर्स को तोहफ़ा

आम जनता के लिए प्रदेश में परिवहन का सुगम साधन रोडवेज संचालित करने वाला राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम गत दस सालों से निरंतर बसों व स्टाफ सहित अन्य जरूरी संसाधनों की कमी के चलते घाटे के साथ ही बदहाली से जूझ रहा है। पिछले करीब चार साल से नई बसों की खरीद व संविदा-निविदा प्रक्रिया फिलहाल कागजों में ही है। किसी जमाने में 4500 बसों के बेड़े वाले पथ परिवहन निगम में बसों की तादाद सिमट कर 1600 तक आ गई है। इनमें भी लगभग 75 फीसदी 1200 बसें खटारा होने के बावजूद रिपेयर कर चलाई जा रही हैं।

पूर्व प्रक्रिया निरस्त, कम दरों की कवायद

अधिकारियों का कहना है कि कुछ माह पूर्व अंतिम दौर तक पहुंची निविदा प्रक्रिया में आला अफसरों ने अनुमानित खर्च 140 करोड़ को ज्यादा बताया। जबकि वे इसे 119 करोड़ तक ही रखना चाह रहे थे। अंतत: निविदा प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। इसके बाद कम दर पर निविदा खोले जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। हालांकि यह भी नई सरकार के काम शुरू करने के बाद ही होना मानी जा रही है।

संसाधनों, स्टाफ का टोटाप्रदेश में रोडवेज के चालक, परिचालक व प्रशासनिक स्टाफ के 2800 पदों पर भर्ती होनी है। कभी रोडवेज का स्टाफ 20 हजार से अधिक था, लेकिन गत 20 सालों से नई भर्ती नहीं हुई। कर्मचारी रिटायर होते गए और बसें नाकारा। प्रदेश के मौजूदा यात्रीभार के अनुसार बेड़े में न्यूनतम 2000 बसों की दरकार है।

इनका कहना हैवर्तमान में तीन चरणों में रोडवेज बसों की खरीद की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। करीब 540 बसों को ऋण के जरिए क्रय किया जाना है। इनमें से करीब 350 बसें रोडवेज अपने स्तर पर व शेष संविदा पर लगाएगा। 300 से अधिक बसें संविदा पर चलाईं जाएंगी। इनमें 50 प्रतिशत की और बढोतरी संभव है। एक अन्य करार में 76 वातानुकूलित बसें भी शामिल हैं। प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। आगामी प्रक्रिया नई सरकार की नीति पर निर्भर रहेगी।

नथमल डिडेल, प्रबंध निदेशक, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम जयपुर

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स्टाफ उपलब्ध संसाधनों में काम संभाल रहा है। निशुल्क प्रतियोगी परीक्षा, वार-त्योहार आदि में रोडवेज सेवा सतत रखने का प्रयास किया जाता है। बसें व स्टाफ में इजाफा होने से राजस्व आय व कर्मचारियों के समय पर वेतन आदि की समस्या भी दूर होगी।

आनंद सिंह न्याल, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भामस। रोडवेज कर्मचारी यूनियन अजमेर।