
अजमेर के विजय स्मारक पर रखा टैंक। फोटो। पत्रिका
अजमेर। भारत-पाक की 1971 की जंग में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए। पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण को मजबूर होना पड़ा। हजारों पाक फौजी मारे गए। पाकिस्तानी सेना के कई टैंक (तोप) भारतीय सेना ने अपने कब्जे में ले लिए। इनमें से एक टैंक को तत्कालीन सरकार एवं सेना ने अजमेर में रखवाया। लेकिन इस टैंक के बैरल पर कभी किसी ने गौर नहीं किया। आज भी हारे हुए पाकिस्तान के टैंक का बैरल जमीन व टैंक की ऊंचाई से ऊपर है।
यह कायदे से नीचे होना चाहिए। अजमेर के बजरंगगढ़ स्थित विजय स्मारक पर जो पाकिस्तान का टैंक रखा है वह भारतीय सेना के शौर्य एवं जज्बे की याद दिलाता है। हर स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर आजादी की याद में मेले लगते हैं। कोई भी बड़ा आयोजन यहां से शुरू होता है या फिर खत्म होता है। मगर यह टैंक देश की सरहद की रक्षा करने वाले सैन्य अधिकारियों, सेना के जवानों के सीने में चुभता भी है।
अपने देश का हथियार एवं टैंक का बैरल हमेशा ऊपर रहता है और अगर किसी दूसरे देश से जीता हुआ या हारे हुए देश का टैंक है तो उसका बैरल जमीन की ओर नीचे ही होता है।
-ए.के. शाह, पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, अजमेर
सेकंड लेफ्टिनेंट हवा सिंहः इन्होंने 4/5 गोरखा राइफल्स में अपनी सेवाएं दीं। अजमेर मिलिट्री स्कूल (1959-1966 बैच) के पूर्व छात्र रहे हवा सिंह ने पूर्वी सेक्टर में 'एटग्राम' की लड़ाई में अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन किया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल सुमेर सिंहः अजमेर मिलिट्री स्कूल के पूर्व छात्र रहे सुमेर सिंह ने भी 1971 के युद्ध में अपनी सक्रिय सैन्य सेवाएं दीं। उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से नवाजा गया था। उनकी टुकड़ी युद्ध के दौरान पश्चिमी सेक्टर साधेवाला क्षेत्र में तैनात थी। मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपालः अजमेर के प्रतिष्ठित लॉरेंस स्कूल (सनवार) से पढ़े थे। उन्होंने 1971 की प्रसिद्ध बैटल ऑफ बसंतर में पाकिस्तान के खिलाफ अदम्य साहस दिखाते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल एन.डी. माथुरः अजमेर जिले के प्रमुख सैन्य अधिकारियों में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एन.डी. माथुर (1966 में कमीशन प्राप्त) शामिल हैं, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया था और युद्ध की विजय गाथाओं के लिए जाने जाते हैं।
Updated on:
11 Jun 2026 11:01 am
Published on:
11 Jun 2026 11:01 am
