
पाक के जुनून के सामने सीधा बल्ला, ऑफ साइड बॉलिंग और शांत दिमाग
उपेन्द्र शर्मा/ अजमेर.होने को सिर्फ एक खेल है, लेकिन चूंकि आधुनिक दुनिया में जंग हो नहीं पाती तो इंसान खेलों को ही जंग की तरह खेलना-देखना चाहता है। क्यूंकि उसे जंगें भाती हैं, खासकर तब जब बात बिना खुद के शामिल हुए सिर्फ देखने की हो। ऐसा ही एक जंगी खेल आज खेला जाएगा भारत पाक के बीच क्रिकेट के मैदान में। पाकिस्तान के हौंसले बुलंद हैं, वहीं भारतीय टीम इन दिनों मानसिक रूप से थोड़ी परेशान है। शारीरिक रूप से भी थोड़ी सी बेजान सी हो रखी है।
हांगकांग के खिलाफ रोहित शर्मा और केदार जाधव जहां ओवरवेट लग रहे थे, वहीं एक अनिच्छा सी थी उनके बीच मैच जीतने को लेकर। महेन्द्र सिंह धोनी की वो चपलता और ऊर्जा भी नजर नहीं आई। विराट तो खैर थे ही नहीं। सेनापति के नहीं रहने से एवजी सेनापति के साथ खिलाडिय़ों का वो कमिटमेन्ट नहीं दिख रहा था, जो दिखना चाहिए। विराट की कमी के मानसिक दबाव को कोच रवि शास्त्री को दूर करना चाहिए, लेकिन वे किसी खिलाड़ी में उत्साह भर सके ऐसी काबिलियत उनमें तो कतई नहीं है। हां लेकिन जॉन राइट, गैरी किस्र्टन, राहुल द्रविड़ में जरूर थी।
एक 20 वर्षीय जवान बॉलर मो. खलील और बल्लेबाज अंबाति रायडू ने जरूर वो जोश दिखाया जो होना चाहिए और हांगकांग को जीत से थोड़ा पहले रोक पाने में टीम कामयाब हो गई। वरना शायद जो हाल श्रीलंका टीम का हुआ है, वही भारतीय टीम का भी होता।अब चूंकि सामने पाकिस्तान है हांगकांग नहीं, तो सिर्फ एक खलील या शिखर धवन के चलने से कुछ नहीं होने वाला। कम से कम धवन, रोहित, रायडू, धोनी को बल्लेबाजी में और भुवनेश्वर कुमार, खलील और चहल को गेंदबाजी में शान दिखानी पड़ेगी, वरना मो. आमिर की गेंदे रोहित और शिखर के गिल्ले उखाड़ देगी और फखर जमान एक और शतक जमा देगा।
जंगी मुद्राओं को प्रदर्शित करना पाक की पुरानी फितरत है, लेकिन उसे परेशान करना बड़ा आसान है। भारतीय खिलाडिय़ों को मैदान पर शांत रहने की जरूरत है। उनके रंग में रंगे बगैर अगर धवन, धोनी और रोहित ने सीधे बल्ले से रन बनाए तो पाक से ज्यादा बेजान गेंदबाजी दुनिया की किसी और दूसरी टीम की नहीं है। लेकिन अगर आड़े बल्ले से खेलना चाहा तो फिर भारतीय टीम धोखा खा जाएगी।
इसके बाद गेंदबाजी में ऑफ साइड को प्रमुखता दी जाए तो पाक बल्लेबाजों की कमजोरी (पिछले 70 साल से) को भुनाया जा सकता है। स्पिनर यजुवेन्द्र चहल खासे कामयाब हो सकते हैं, लेकिन कुलदीप यादव नहीं। सबसे महत्वपूर्ण है शांति। शांत दिमाग से पाकिस्तानी बहुत चिढ़ते हैं। उन्हें सबसे खतरनाक शांति ही लगती आई है। ऐसे में उनके छिछले जुनून को भौंतरा करने के लिए शांत दिमाग की जरूरत रहेगी ही।
गेंदबाज शार्दुल ठाकुर, केदार जाधव और दिनेश कार्तिक को बाहर रखना चाहिए। यह तीनों ही खिलाड़ी इतने ऊंचे दर्जे के मैच लायक लग नहीं रहे हैं। इनके बजाए खलील की ही तरह राष्ट्रीय स्तर पर पिछले दिनों बहुत जबरदस्त खेल रहे किन्हीं और खिलाडिय़ों को मौका देना चाहिए। वरना मानसिक कमजोरी से जूझ रही टीम इनके बोझ से डूब जाए।
Published on:
19 Sep 2018, 1:49 PM IST
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