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आईसीयू में मासूमों का बढ़ा दर्द
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आईसीयू में मासूमों का बढ़ा दर्द

शिशु विभाग के आईसीयू में केयर को नहीं है रेजीडेंट डॉक्टर्स, पहले भी खो चुके हैं मासूमों को
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अजमेर

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Chandra Prakash Joshi

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Updated: 4 Dec 2019, 10:41 PM IST

अजमेर. संभाग मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में करीब 290 रेजीडेंट चिकित्सकों का कार्य बहिष्कार दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। अस्पताल में 24 घंटे सेवाएं देने वाले रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के बावजूद अस्पताल प्रशआसन सब कुछ अच्छा ही बता रहा है मगर आईसीयू में मासूम (नवजात) बच्चों की जान सांसत में है।

जेएलएन मेडिकल कॉलेज के सभी रेजीडेंट के कार्य बहिष्कार के चलते शिशु रोग विभाग की गहन चिकित्सा इकाई/ आईसीयू में मासूम बच्चों की देखभाल एवं उपचार अब नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से सहायक आचार्य, आचार्य आदि की ड्यूटी तो लगाई गई है मगर 24 घंटे सेवाएं वरिष्ठ चिकित्सक दे पाएंगे संभव नहीं है। प्रशासन की जरा सी लापरवाही मासूम बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। दो साल पूर्व भी गर्मी के मौसम में एक ही सप्ताह में करीब 15 से 20 बच्चों की मौत शिशु रोग विभाग में हो चुकी है। ऐसे में उपचार में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

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30 नए मरीज/ बच्चे भर्ती, डॉक्टर ही नहीं!

शिशु रोग विभाग में रेजीडेंट हड़ताल के बावजूद करीब 30 से 35 बच्चे भर्ती हुए हैं। आईसीयू के सभी बैड फुल हैं। डे, इवनिंग एवं नाइट ड्यूटी में किसी में रेजीडेंट डॉक्टर नहीं है, जबकि हर ड्यूटी में आईसीयू में 2 से 3 रेजीडेंट डॉक्टर मिलकर सभी बैड पर बच्चों का उपचार एवं देखभाल करते हैं। चिकित्सकों के अनुसार 24 घंटे उपचार में परेशानी तो है, रेजीडेंट जितनी ड्यूटी दे पाते हैं उतनी वरिष्ठ चिकित्सक नहीं दे पाते हैं।