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राजस्थान में 12 जिलों की कमान महिला कलक्टर के हाथ, प्रशासनिक कार्यों में बेहतरीन प्रबंधन

International Women's Day Special : प्रशासनिक कार्यों में महिला कलक्टर्स का प्रबंधन पुरुषों के मुकाबले बेहतरीन है। महिला कलक्टर शहर-उपखंड की सूरत बदल रही हैं। मौजूदा वक्त 12 जिलों की कमान महिला कलक्टर के पास है।

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डॉ. भारती दीक्षित - श्रुति भारद्वाज - शुभम चौधरी

Ajmer News : प्रशासनिक कार्यों में महिला कलक्टर्स का प्रबंधन पुरुषों के मुकाबले बेहतरीन है। महिला कलक्टर शहर-उपखंड की सूरत बदल रही हैं। मौजूदा वक्त 12 जिलों की कमान महिला कलक्टर के पास है। वह सख्ती से अतिक्रमण हटाने, स्वच्छता, ट्रेफिक मैनेजमेंट के अलावा जनसुनवाई, सरकारों की फ्लैगशिप योजनाओं की क्रियान्विति एवं महिलाओं-बालिकाओं से संवाद में अग्रणी हैं। पुरुषों के मुकाबले महिला कलक्टर्स की कार्य प्रणाली 55 प्रतिशत तक बेहतर है। पूर्व में भी विभिन्न जिलों में उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता साबित की है।

डॉ. भारती दीक्षित : अजमेर : स्मार्टसिटी, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा व अन्य कार्य

श्रुति भारद्वाज : डीग : स्वीप कार्यक्रम, जनसुनवाई, स्वच्छता

शुभम चौधरी : सिरोही : सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं

अर्तिका शुक्ला : खैरथल-तिजारा : नवगठित जिले का योजनाबद्द विकास

श्वेता चौहान : केकड़ी : नवगठित जिले का योजनाबद्द विकास

डॉ. सौम्या झा : टोंक : ट्रेफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य-शिक्षा सेवा व अन्य

कल्पना अग्रवाल : बहरोड़ : नवगठित जिले का योजनाबद्द विकास

पुष्पा सत्यानी : चूरू : नियोजित विकास व सरकार की योजनाएं

नमृता वृष्णि : बीकानेर : स्वीप कार्यक्रम, सरकारी की योजनाएं

अंजलि राजौरिया: प्रतापगढ़: कानून-व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य कार्य

पूजा कुमारी पार्थ : जालौर : ट्रेफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य-शिक्षा सेवा व अन्य

चिन्मयी गोपाल: झुंझुनूं : केंद्र-राज्य सरकारी की योजनाओं का कार्य

यह भी पढ़ें : राजस्थान रोडवेज बसों में आज बिना किराया दिए सफर कर रहीं महिलाएं, रात 12 बजे तक है Free Entry

- महिलाओें-बालिकाओं से संवाद

पुरुष : 35 प्रतिशत, महिला : 65 प्रतिशत

- प्रशासनिक सक्रियता

पुरुष : 45 प्रतिशत, महिला : 55 प्रतिशत

- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

पुरुष : 35 प्रतिशत, महिला : 65 प्रतिशत

- शहरों की सफाई और सौंदर्यीकरण

पुरुष : 25 प्रतिशत, महिला : 75 प्रतिशत

- सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का कार्य

पुरुष : 50 प्रतिशत, महिला : 50 प्रतिशत

- ट्रेफिक मैनेजमेंट

पुरुष 45 प्रतिशत, महिला : 55 प्रतिशत

- शहरों की रैंकिंग सुधारने में योगदान

पुरुष 40 प्रतिशत, महिला : 60 प्रतिशत

- स्मार्ट सिटी के कामकाज रू पुरुष

पुरुष 42.5 प्रतिशत, महिला : 59.5 प्रतिशत

- जिलों में कानून व्यवस्था नियंत्रण

पुरुष : 40.2 प्रतिशत, महिला : 59.8 प्रतिशत

अजमेर में बांडी नदी का जलप्रवाह क्षेत्र अतिक्रमण में खो गया। जिला कलक्टर डॉ. भारती दीक्षित ने सख्ती दिखाई तो एडीए सहित प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। बांडी नदी के खोए मार्ग से अतिक्रमण हट रहे हैं। कलक्टर की सख्ती से ही शहर में सफाई, ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार होने लगा है। 90 के दशक में कलक्टर रहीं अदिति मेहता अजमेर की रोल मॉडल हैं। उन्होंने दरगाह बाजार और पुरानी मंडी इलाके में सख्ती से अतिक्रमण हटाए। अजमेर जिला देश में संपूर्ण साक्षर बना। मुख्य सचिव रहीं उषा शर्मा ने अजमेर कलक्टर के रूप में जनाना हॉस्पिटल की शिफ्टिंग सहित कई बेहतर कार्य किए।

कुशल सिंह व ऊषा शर्मा ने मुख्य सचिव रहते ब्यूरोक्रेसी को संभाला। वीनू गुप्ता, श्रेया गुहा, शुभ्रासिंह, रोली सिंह, गायत्री राठौड़, मंजू राजपाल, डॉ. आरुषि मलिक, आरती डोगरा, शुचि त्यागी सहित कई महिला अधिकारियों ने बतौर कलक्टर, शासन सचिव, प्रमुख शासन सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में छाप छोड़ी है।