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pushkar fair festival 2017 : इटली के जोनो को मिला पुष्कर में सुकून, दीक्षा लेकर बने संत

खुद का जीवन ही बदल दिया। वे जूना अखाड़ा के संत से दीक्षा लेकर सन्यासी बन गए हैं।

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foreigner turns saint in pushkar

foreigner turns saint in pushkar

रक्तिम तिवारी/महावीर भट्ट/पुष्कर/अजमेर।

पुष्कर का आध्यात्म और सनातन संस्कृति विदेशों को हमेशा से आकर्षित करती रही है। यूं तो कई विदेशी पुष्कर आते रहे हैं, लेकिन इटली के जोनो ने तो खुद का जीवन ही बदल दिया। वे जूना अखाड़ा के संत से दीक्षा लेकर सन्यासी बन गए हैं।

जगतपिता ब्रह्मा नगरी की आध्यात्मिकता और संतों के सानिध्य ने विदेशी पर्यटकों के जीवन में भी बदलाव की बयार ला दी है। यही कारण है कि मेले के दौरान विदेशी सैलानी घंटों संत-महंत के पास बैठकर ध्यान और धर्मचर्चा कर रहे हैं। इटली का जोनो नामक पर्यटक पुष्कर घूमने आया था। उसे पुष्कर ऐसा पसंद आया कि अचानक जिंदगी की राह बदलने का फैसला कर लिया। जोनो जूना अखाड़ा संत से दीक्षा लेकर संन्यासी बन गया है। उसने अपना नाम जीनीगिरी रख लिया। पर्यटक ने पारम्परिक संस्कृति के अनुसार सिर मुंडवाया, तिलक लगवाया तथा संन्यासी की तरह भगवा वस्त्र पहन लिए। इसके बाद वह अपने गुरु के साथ मंदिरों के दर्शन करने निकल पड़ा।

हरे रामा हरे कृष्णा
सन्यासी जीनीगिरी ने बताया कि भारतीय वैदिक संस्कृति वास्तव में अद्भुत है। आध्यात्म, मंत्रोच्चार, भजनों को सुनकर सुकून मिलता है। हरे रामा हरे कृष्णा को जपने और भजने मात्र से मन में ऊर्जा का संचार होता है। भारत के बाद आध्यात्म और संस्कृति की विरासत है। यह दुनिया के किसी दूसरे देश में देखने को नहीं मिलती है। यही कारण है, कि विदेशी सैलानी भारत की प्राचीन संस्कृति, रीति-रिवाज, आध्यात्म, पूजा पद्धति को समझने-अपनाने आते हैं।

सिर पर मटकी रख दौड़ी महिलाएं

मेला मैदान में मटका रेस काफी रोचक रही। देशी व विदेशी महिलाएं सिर पर अधजल भरी मटकी रखकर दौड़ पड़ी। कोई मटकी के साथ बीच रास्ते मे ही गिर गई तो किसी ने अंत तक साहस नहीं छोड़ा तथा बाजी जीत ली। प्रतियोगिता मे करीब 15 महिलाओं ने हिस्सा लिया। सिर पर मटका लेकर दौड़ती महिलाओं में जयपुर के हरमाड़ा गांव निवासी चांद जाट प्रथम रही। पुष्कर की रेखा सुवासिया दूसरे तथा हरमाड़ा की सीता जाट तीसरे स्थान पर रही। सभी को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में चार विदेशी महिलाएं भी सिर पर मटकी रख कर धोरों में दौड़ीं, लेकिन पीछे रह गईं।

म्यूजिकल चेयर रेस में पहली बार विदेशी महिला प्रथम

मेला मैदान में आयोजित म्यूजिकल चेयर रेस में पहली बार विदेशी महिला ने प्रथम पुरस्कार जीता। प्रतियोगिता में 29 महिलाओं ने हिस्सा लिया। हिन्दी गानों पर प्रतिभागियों ने मैदान में रखी चेयर की परिक्रमा लगाई। गाना रुकने के साथ ही सही दिशा में आगे की ओर दौड़ते हुए चेयर पर बैठ गईं। प्रतियोगिता के आखिरी राउंड में आस्ट्रेलिया की बेव सिसेज तथा राजगढ़ गांव की सराया के बीच मुकाबला हुआ। गाना बंद होते ही दोनों प्रतिभागी कुर्सी पर बैठ गर्ईं। दोनों को प्रथम घोषित करते हुए पुरस्कृत किया गया। दूसरे स्थान पर चीताखेड़ा निवासी फूटर देवी तथा तीसरे स्थान पर लीयोनी रियट रही।