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हमको माफी दई दो हमसे भूल हो गई…क्षमा के सागर में याचना के लगाए गोते

अजमेर के जैन श्वेताम्बर समाज ने मनाया सामूहिक क्षमायाचना पर्व. मन, वचन और काया से हुई गलतियों की मांगी माफी
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अजमेर

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Suresh Bharti

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Updated: 5 Sep 2019, 6:40 PM IST

Jain Shwetambar Samaj of Ajmer celebrates mass amnesty

हमको माफी दई दो हमसे भूल हो गई...क्षमा के सागर में याचना के लगाए गोते

अजमेर. जैन श्वेताम्बर समाज ने कई जगह क्षमायाचना पर्व मनाया। इस दौरान सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगी गई। इसके साथ ही पर्युषण पर्व का समापन हो गया। श्री वद्र्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से बी. के. कौल स्थित मणिपुंज में आयोजित सामूहिक क्षमायाचना समारोह में समाज के महिला-पुरुष शामिल हुए। कोई गले मिलकर तो अधिकतर ने पैर छूकर माफी मांगी। दोनों हाथ जोड़े,सिर झुकाया और चेहरे पर मुस्कान के साथ हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने क्षमा के सागर में याचना के गोते लगाए।

संघ के अध्यक्ष शिखरचंद संघी ने कहा कि जैन धर्म के सिद्धांतों से ही मानव कल्याण संभव है। किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचे। आत्मा को ठेस नहीं लगे। प्रेम, सद्भाव व भाईचारे के साथ सभी मिलकर रहें। जैन धर्म यही संदेश दे रहा है। श्रावक संघ के अनिल कोठारी, मुकेश कर्णावट, सुनील छाजेड़, तारांचद कर्णावट व सुरेश नाहर सहित समाज के कई प्रमुख लोगों ने समाज विकास, समरसता और जनसेवा पर जोर दिया।

इसी प्रकार वैशाली नगर स्थित तेरापंथ स्थानक पाश्र्वनाथ कॉलोनी में भी बुधवार को सामूहिक क्षमायाचना पर्व मनाया गया। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने एक-दूसरे से गले मिल व हाथ जोडक़र वर्षपर्यंत हुई गलतियों की माफी मांगी।

क्षमा व्यक्तित्व की पहचान

मणिपुंज में जैन संत नवीन प्रज्ञ ने कहा कि जैन समाज ने सारी दुनिया को प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया है। धरती पर इंसान ही नहीं,जलचर, नभचर और वन्यजीवों पर दया,अहिंसा और जीने के अधिकार की बात जैन धर्म ही करता है। अहिंसा परमोधर्म का सिद्धांत दुनिया को एकता के सूत्र में पिरो रहा है।

त्याग और तपस्या के जरिए इंसान को निर्मल और संयमित जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है। नवीन प्रज्ञ ने बुधवार को प्रवचनों में कहा कि क्षमा करना व्यक्तित्व की पहचान है। गलतियां करना मानव का स्वभाव है। क्षमा मांगना और माफ करना व्यक्ति की सकारात्मक सोच का परिणाम है। पर्युषण पर्व पर श्रावक-श्राविकाओं ने तप और त्याग के जरिए भगवान अरिहंत की आराधना की है। इससे निश्चय ही धर्म की प्रभावना बढ़ी है।

दिगम्बर जैन समाज का पर्युषण पर्व...

अजमेर. पल्लीवाल दिगम्बर जैन मंदिर पाल बीचला, अजमेर में उत्तम मार्दव धर्म पर भगवान सुपाश्र्वनाथ का गर्भ कल्याणक दिवस मनाया गया। नवकार महिला मण्डल की अध्यक्ष सरिता जैन ने बताया कि ब्रह्मचारिणी बहन संगीता दीदी व नेहा दीदी के सान्निध्य में श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा हुईं। नित्य नियम पूजा की गई।

उत्तम मार्दव धर्म की संगीतमय पूजा में श्रावक- श्राविकाओं ने भाग लिया। प्रवचनों में ब्रह्मचारिणी ने कहा कि मृदुवाणी से बोलना भी मनुष्य का उत्तम मार्दव धर्म है। मार्दव का विपरीत है मान या मद। यह आठ प्रकार का होता है।
भक्ति नृत्य व एक मिनट प्रतियोगिता : श्री दिगम्बर जैन मंदिर पंचशील नगर में उत्तम मार्दव धर्म पर प्रात: भगवान के अभिषेक व वृहद शांतिधारा हुई। अंकित पाटनी ने बताया कि पूजन विधान में नवल छाबड़ा, श्वेता छाबड़ा, मोनिका गंगवाल ने भक्ति नृत्य किया।

सांयकाल शास्त्र प्रवचन नरेन्द्र अजमेरा ने किया। एक मिनट प्रतियोगिता का दीप प्रज्वलन व पुरस्कार वितरण विमल अविनाश अजमेरा परिवार ने किया। निर्णायक की भूमिका पुष्पा पाटोदी, आभा बाकलीवाल ने निभाई। गुरुवार रात पंचशील मंदिर में धार्मिक हाऊजी का कार्यक्रम होगा।

नैतिकता की कमी नाटक का मंचन : अखिल भारतीय पुलक जन चेतना मंच महिला जागृति मंच एवं बड़ा धड़ा पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में दस लक्षण पर्युषण पर्व के दौरान बुधवार को उत्तम मार्दव धर्म की संगीतमय भक्ति के साथ मंदिर और जिनालयों में पूजा की गई। बड़ा धड़ा पंचायत के अध्यक्ष प्रदीप पाटनी व प्रवक्ता कमल गंगवाल ने बताया कि नसियां प्रांगण में नैतिकता में कमी विषय पर नाट्य का मंचन हुआ। बीना कासलीवाल, मीनाक्षी एवं सुगंधा एंड ग्रुप की ओर से यह आयोजन हुआ।