अजमेर. मुख्य अतिथि एवं विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप राजस्थान के कण-कण में मान मर्यादा और बलिदान की जीवंत और अमिट कहानी हैं। हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं और शहरीकरण की अंधाधुंध दौड़ में भाग रहे हैं। हमें अपनी मातृभूमि और जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। वे कुंदननगर स्थित परमवीर मेजर शैतान सिंह राजपूत छात्रावास प्रांगण में सोमवार को महाराणा प्रताप की 483 वी जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। मेजर शैतान सिंह के बारे में उन्होंने कहा इतिहास में इस तरह के वीरता के उदाहरण कम ही हैं। अध्यक्षता करते हुए आरटीडीसी चैयरमेन धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन का लक्ष्य प्रथमतः मेवाड़ को विदेशी सत्ता या प्रभाव से मुक्त रखना था ,और वह मृत्युपर्यन्त दृढ़ रहे। सहयोग, समन्वय और समानता का पावन गठजोड़ हर जाति समुदाय के साथ महाराणा प्रताप की विशेष विशेषता रही है। विशिष्ट अतिथि महेंद्र सिंह रलावता ने कहा की वर्तमान में जो ‘सोशल इंजीनियरिंग’ शब्द प्रचलित है इसका महाराणा ने सैकड़ों वर्ष पूर्व ही उदाहरण प्रस्तुत कर दिया था। विशिष्ट अतिथि हनुमान सिंह भाटी, समाजसेवी दलपत सिंह रुणीजा ने भी इस अवसर पर अपने विचार प्रकट किए। विशिष्ट अतिथि सुरेन्द्र सिह शेखावत, विधायक वासुदेव देवनानी भी मौजूद रहे। समारोह में स्मारिका का विमोचन भी किया गया। भामाशाहों का भी सम्मान किया गया ।
कार्यक्रम में राजपूत समाज के महेंद्र सिंह कड़ेल, डॉ. अजय सिंह राठौड़ बहादुर सिंह गुढ़ा, गजेंद्र सिंह रलावता, अजीत सिंह भाटी, पदम सिंह, लक्ष्मण सिंह गेमलियावास, सुरेंद्र सिंह थेबड़ी, सहित राजपूत समाज के सैकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे। अध्यक्ष सुमेर सिंह दिसनऊ ने परिचय कराया, सचिव रणजीत सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित कराया। संचालन पार्षद देवेंद्र सिंह शेखावत ने किया।