
water crisis in ajmer
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
संभाग में अब तक इंद्र देव की खास मेहरबानी नहीं हुई है। मानसून की बेरूखी कायम है। मामूली टपका-टपकी से कोई फर्क नहीं पड़ा है। 1 जून से 11 जुलाई तक हुई करीब 50 मिलीमीटर बरसात से लोगों की चिंता बढ़ गई है। जहां खेतों में बुवाई कर चुके किसानों को बीज खराब होने का डर है। वहीं आबादी क्षेत्रों में पीने का पानी नहीं है। महिलाओं को टैंकर, कुएं और हैडपम्प से पानी लाना पड़ रहा है।
जिले में मानसून अब तक सुस्त ही दिख रहा है। सम्भाग के अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक और नागौर जिले में जून के अंत से अब तक छिटपुट बरसात हुई है। चारों जिलों में अब तक कहीं ताबड़तोड़ बरसात नहीं हुई है। कम बरसात से किसानों के चेहरे मुरझाए हुए है। खेतों में किसानो ने बुवाई के बाद बीज बो दिए थे। एकाएक तीखी धूप और गर्मी ने उनके अच्छी फसल की आस तोड़ दी है। जिले और आसपास के अधिकांश गांवों के यही हाल है।
निकटवर्ती कायड़ गांव में टांके, तालाब, कुएं सूखे पड़े है। गांव के फूलसागर तालाब और श्रवण की नाडी में पानी की एक बंूद नहीं है। कभी लबालब रहने वाले कुएं सूखे पड़े हैं। महिलाओं को दूरदराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है। कहीं-कहीं टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है। राम के साथ राज भी रूठ गया है। मवेशियों के लिए भी पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग के दावे फेल
मौसम विभाग ने केरल में बरसात शुरू होने के सात जून के अंत तक प्रदेश और अजमेर संभाग में मानसून सक्रिय होने की भविष्यवाणी की थी। लेकिन दो-तीन बरसात के बाद मानसून सुस्त पड़ गया। 11 जुलाई तक भी अजमेर संभाग में कहीं पर्याप्त बरसात नहीं हुई है। अजमेर और जयपुर जिले की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध का जलस्तर पिछले साल करीब 314 आरएल मीटर था। वह लगातार घट रहा है।
किसानों को नुकसान
पूरे अजमेर जिले में पर्याप्त बरसात नहीं हुई है। किसानों ने पिछले महीने अच्छी बरसात की आस में बुवाई कर दी। जुलाई में कड़क धूप आर गर्मी फिर बढ़ गई। कम बरसात से खेतों में बीज जलने की पूरी आशंका है।
श्योराज गुर्जर, उप सरपंच
हमें तो मवेशियों के लिए भी पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है। बुवाई कर चुके हैं, पर गर्मी के कारण बीज पनपना मुश्किल है। बरसात बादल आते हैं पर बरसे बिना लौट जा रहे हैं। किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी तो नुकसान होगा।
कान्हाराम गुर्जर किसान
गांव में पानी की किल्लत
गांव में पानी की किल्लत से परेशान हैं। मई-जून में तो बहुत हाल खराब थे। जुलाई में भी बरसात नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। आसपास के कुओं, तालाबों में भी पानी नहीं है। बड़ी मुश्किल से पानी का बंदोबस्त करना पड़ रहा है।
अनवर खां
पानी की कमी पूरे गांव में बनी हुई हैं। कभी टैंकर तो कभी हैंडपम्प से पानी मिल पाता है। गांव में जानवरों के लिए भी पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। बरसात नहीं हुई तो बहुत दिक्कतें होंगी।
नौरतमल
पानी के लिए हमें बहुत मुसीबत उठानी पड़ रही है। नल में जलापूर्ति बहुत कम होती है। मटके-बाल्टी लेकर टैंकर से पानी भरना पड़ता है, या कुओं तक जाना पड़ता है। जमकर बरसात नहीं हुई तो पूरा साल निकालना मुश्किल होगा।
नफीसा
Published on:
12 Jul 2018 08:18 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
