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महावीर थारा देश में रेलगाड़ी आई, चौदह सपने लाई…

.महावीर थारा देश में रेलगाड़ी आई, चौदह सपने लाई... - दादाबाड़ी में मनाया भगवान महावीर का जन्मोत्सव - 14 स्वप्नों की 1.49 लाख मण घी की बोलियां लगाई श्री खरतरगच्छाचार्य जिनदत्तसूरि दादाबाड़ी में भगवान महावीर स्वामी के जन्म की घोषणा के साथ ही खरतरगच्छ श्वेताम्बर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। चारों तरफ खुशियां मनाई गईं। लोगों ने महावीर स्वामी के जन्म की बधाईयां दीं।

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अजमेर

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Dilip Sharma

Aug 17, 2023

महावीर थारा देश में रेलगाड़ी आई, चौदह सपने लाई...

महावीर थारा देश में रेलगाड़ी आई, चौदह सपने लाई...

अजमेर. श्री खरतरगच्छाचार्य जिनदत्तसूरि दादाबाड़ी में भगवान महावीर स्वामी के जन्म की घोषणा के साथ ही खरतरगच्छ श्वेताम्बर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। चारों तरफ खुशियां मनाई गईं। लोगों ने महावीर स्वामी के जन्म की बधाईयां दीं। इस मौके पर साध्वी मनोहर श्रीजी ने जन्म वाचन सुनाया। महावीर थारा देश में रेलगाड़ी आई चौदह सपने लाई।

दादाबाड़ी में गुरुवार को भगवान के जन्मोत्सव पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इससे पूर्व माता त्रिशला को भगवान महावीर के जन्म से पूर्व आए 14 स्वप्नों का अवतरण किया गया। जनमानस ने मणों में घी की बोली लगाई। दादाबाड़ी में आज भी ढाई रुपए मण घी का भाव चल रहा है।रिखब सुराना ने बताया कि जन्मोत्सव के भगवान महावीर स्वामी के पालने और सभी 14 स्वप्नों को महिलाओं ने सिर पर रखकर दादाबाड़ी परिसर में चैत्य परिपाठी निकाली और देवदर्शन किए। इन स्वप्नों में माता त्रिशला ने सपने में देखा कि उसका पुत्र गजराज के समान बलिष्ठ, सूर्य के समान तेज चमकता हुआ, चन्द्रमा के समान शान्त स्वभावी, खीर समुद्र के समान मीठा व्यवहारी होगा और उसके पास रत्नों का ढेर होगा, लक्ष्मी की उस पर कृपा रहेगी और वह विमानों में उड़ेगा।

सुराना ने बताया कि 14 स्वप्न में सर्वाधिक बोली चौथे स्वप्न की कमल कक्कड़ ने 27501 मण घी की लगाकर लक्ष्मीजी का स्वप्न हासिल किया। 14 स्वप्नों की कुल 1.49 लाख मण घी की बोलियां लगाई गई।इस दौरान सन्तोषचन्द सुराना, विक्रम पारख, महेन्द्र लूणिया, सुशील वेद, अनिल धारीवाल, जयदीप पारख, दिनेश मेहता आदि मौजूद रहे। खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष विक्रम पारख ने बताया कि जहाजपुर बिलाड़ा निवासी त्रिलोकचन्द, महावीर, मनोज, हिमांशु श्रीमाल परिवार का सहयोग रहा। प्रभावना, कमल कक्कड़, ज्ञानचन्द मालू, त्रिलोकचन्द श्रीमाल, नरेन्द्र लूणिया, सज्जनराज बुरड़, सुकेश कांकरिया, संजय भड़गतिया, महेन्द्र लूणिया ने वितरित की। संचालन नरेन्द्र लालन व सतीश बुरड ने किया।

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