
24 hours library
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
पढऩे वालों के लिए 24 घंटे लाइब्रेरी खुली रखने की योजना महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में शुरू नहीं हो पाई है। इसके लिए सीधे तौर पर विद्यार्थी और आमजन जिम्मेदार हैं। विश्वविद्यालय को इनसे पुस्तकालय में पढऩे-लिखने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं मिल पाया है।
विश्वविद्यालय में सारस्वत केंद्रीय पुस्तकालय बना हुआ है। यहां हिंदी,अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, साहित्य, विज्ञान, ललित कला, वाणिज्य, प्रबंधन और अन्य विषयों की नई एवं परानी पुस्तकें संग्रहित हैं। दो मंजिला लाइब्रेरी में कई भाषाओं की पत्र-पत्रिकाएं आती हैं। यह इन्फ्लिबनेट के जरिए देश-दुनिया की विभिन्न लाइब्रेरी से जुड़ी हुई है।
बनाया था यह प्रस्ताव तैयार
पूर्व छात्रों की एल्यूमिनी ने तत्कालीन कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह को विश्वविद्यलाय के सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सेंट्रल लाइब्रेरी 24 घंटे खोलने का सुझाव दिया था। उन्होंने इस पर तत्काल सहमति जताई। लेकिन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेज के छात्र-छात्राओं, शहरवासियों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने संपर्क तक नहीं किया। ऐसा तब है, जबकि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में किताबों, पत्र-पत्रिकाओं की कोई कमी नहीं है। विद्यार्थी और लोग चाहें तो इसका फायदा उठा सकते हैं।
लाइब्रेरी में बनने थे जोन
योजना के तहत लाइब्रेरी की पुस्तकों को विभिन्न विधाओं के अनुसार जोन में बांटा जाना था। इसके तहत साहित्यकार, कला एवं संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, संगीत, उच्च-तकनीकी शिक्षा, जीवन दर्शन और अन्य जोन प्रस्तावित थे। ताकि संबंधित विषय की किताबें उसी जोन में आसानी से मिल सकेगी। विद्यार्थियों और आजमन के रीडिंग रूम अलग-अलग बनाने थे।
ताले में बंद बुक वल्र्ड
विश्वविद्यालय परिसर में बना बुक वल्र्ड ताले में बंद है। वर्ष 2010-11 में राजस्थान विश्वविद्यालय की तर्ज पर इसे शुरू किया गया था। यहां महात्मा गांधी, डॉ. हरिवंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अमत्र्य सेन, विक्रम सेठ, चेतन भगत और अन्य नामचीन लेखकों की पुस्तकें रखी गई। नौजवानों और पाठकों की अरुचि के चलते यह बंद पड़ा है।
नामचीन संस्थानों में यह व्यवस्था
विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी का इस्तेमाल अभी कैंपस के विद्यार्थी और शिक्षक ही करते हैं। जबकि आईआईटी, आईआईएम और दुनिया की अधिकांश उच्च, तकनीकी, चिकित्सा एवं अन्य संस्थानों में लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है। इनमें आमजन भी शाम अथवा रात्रि में बैठक किताबें पढ़ते हैं।
Published on:
17 Feb 2019, 3:13 PM IST
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