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देखें…यहां मैया यशोदा करा रहीं नवजातों को अमृतपान

स्पॉट लाइट : ब्यावर के मदर मिल्क बैंक ने दी नवजात प्री-मेच्योर बच्चों को संजीवनी

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अजमेर

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Manish Singh

Feb 04, 2022

देखें...यहां मैया यशोदा करा रहीं नवजातों को अमृतपान

देखें...यहां मैया यशोदा करा रहीं नवजातों को अमृतपान

मनीष कुमार सिंह

अजमेर(ajmer). विधाता ने मां को ना केवल बच्चे को जन्म देने की शक्ति दी बल्कि उसका दूध प्री मेच्योर व नवजात के लिए संजीवनी भी बनाया। प्रदेश में बीते 5 साल में 28 से भी ज्यादा मदर मिल्क बैंक(कॉम्प्रेसिव लेक्टेशनर मैनेजमेट सेंटर) स्थापित किए जा चुके हैं। जहां राज्य की लाखों माएं यशोदा बनकर अपने बच्चों को अमृतपान करवा रही है। उन्हीं में से एक है ब्यावर का राजकीय अमृतकौर अस्पताल स्थित आंचल मदर मिल्क बैंक(Mother Milk Bank)। जहां समय पूर्व जन्में सैकड़ों बच्चे मां के दूध से तंदरूस्त और सेहतमंद जिन्दगी का वरदान पा चुके हैं।

बच्चों के लिए संजीवनी

ब्यावर का आंचल मदर मिल्क बैंक(Mother Milk Bank) अब तक दर्जनों नवजात बच्चों को मां का दूध मुहैया करवा चुका है। ये वो बच्चे हैं जिनकी जन्मदात्री अकाल ही काल का ग्रास बन गई या फिर प्री मैच्योर डिलीवरी या स्वास्थ्यगत जटिलता के चलते अपने ही बच्चे को दूध नहीं पिला पा रही। फरवरी 2017 को स्थापित सेंटर ने बीते पांच साल में 16 हजार 68 माओं ने रजिस्ट्रेशन कराकर दुग्धदान किया। जो 31 हजार 421 मर्तबा सेंटर की सेवाएं ले चुकी हैं। बीते कुछ वर्षों में प्री-मेच्योर बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट को देखते हुए राज्य सरकार ने मिल्क बैंक में स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। जिसमें अब तक 55 हजार 195 माताओं को स्तनपान करवाने के लिए काउंसिलिंग दी जा चुकी है।

3 हजार नवजात को फायदा

ब्यावर मदर मिल्क सेंटर(Mother Milk Bank) का फायदा अब तक करीब 3 हजार 166 नवजात को मिल चुका है। इसमें 30 हजार 65 युनिट मां का दूध एकत्र किया जा चुका है। पांच साल में 6 हजार 688 माताओं ने 14 हजार 752 मर्तबा अपना दूध दान किया। जिससे मदर मिल्क बैंक को 10 लाख 30 हजार 760 मिली. दूध मिला। इससे 33 हजार 393 यूनिट मिल्क तैयार कर करीब साढ़े 3 हजार नवजात को दिया जा चुका है।

जेएलएनेच को मिला 3 हजार यूनिट

ब्यावर मदर मिल्क बैंक(Mother Milk Bank) अब तक 3 हजार यूनिट मिल्क जेएलएन मेडिकल कॉलेज को दे चुका है। इससे पूर्व प्रदेश के अन्य पड़ोसी जिले के नवजात बच्चों को भी मां का दूध भेजा चुका है। हालांकि बीते पांच साल में राज्य व केन्द्र सरकार की आर्थिक मदद से प्रदेश में 28 से ज्यादा मदर मिल्क बैंक स्थापित किए जाने से क्रांतिकारी बदलाव आया हैं। इससे पूर्व में बनाए गए बैंक व सेंटर पर निर्भरता कम हुई है।

आंकड़ों में मदर मिल्क बैंक(Mother Milk Bank)

एम.एल.दूध का दान

6,688-रजिटर्ड डोनर

14,782-डोनर सीटिंग

31,421-माताओं ने ली सेवा

3166 बच्चों को मिला मां का दूध

स्वस्थ, स्वच्छ वातावरण

ब्यावर अस्पताल का मदर मिल्क बैंक(Mother Milk Bank) किसी भी निजी अस्पताल को मात देने के लिए काफी है। स्वच्छ वातावरण में माताओं के लिए दुग्धदान के लिए बना वातानुकूलित हॉल आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है। माताओं के बैठने के अलावा अत्याधुनिक लेब में माइन्स -20 डिग्री पर मदर मिल्क(Mother Milk) को सुरक्षित रखने वाला स्टोरेज व उसको तैयार करने के उपकरण मौजूद है। स्टाफ की कमी के बावजूद डॉ. मनोहरसिंह चांदावत अपने नर्सिंग स्टाफ के बूते साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखते हैं।

इनका कहना है...

मदर मिल्क बैंक का नाम बदलकर कॉम्प्रेसिव लेक्टेशनर मैनेजमेट सेंटर कर दिया है। यह अब मिल्क बैंक ना होकर स्तनपान के लिए जागरूकता लाने का सेंटर बन गया है। मां का दूध 6 माह तक नवजात बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार है। ऐसे में स्तनपान के लिए महिलाओं को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य जटिलताएं आती है तो उनका समाधान भी किया जाता है।

डा. मनोहरसिंह चांदावत, प्रभारी, मदर मिल्क बैंक ब्यावर

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