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58 चिकित्सकों और कार्मिकों को थमाए नोटिस, 27 ने दिए जवाब

जेएलएन अस्पताल में निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहने का मामला, फार्मासिस्ट व भण्डार प्रभारियों में समन्वय का अभाव
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अजमेर

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Chandra Prakash Joshi

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Updated: 8 Dec 2019, 8:01 AM IST

58 चिकित्सकों और कार्मिकों को थमाए नोटिस, 27 ने दिए जवाब

58 चिकित्सकों और कार्मिकों को थमाए नोटिस, 27 ने दिए जवाब

अजमेर. जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा के नेतृत्व में जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम की ओर से औचक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले 58 चिकित्सकों एवं कार्मिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन व अस्पताल प्रशासन के नोटिस के बाद करीब 27 चिकित्सकों/कार्मिकों ने नोटिस के जवाब दिए हैं, अभी इतने ही चिकित्सकों/कार्मिकों के जवाब का इंतजार है। सभी के जवाब मिलने पर सोमवार तक जिला प्रशासन को भिजवाया जाएगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वीसी के दूसरे ही दिन जिला कलक्टर की ओर से संभाग मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल का निरीक्षण किया गया। औचक निरीक्षण में विभागवार टीमें पहुंची ओर से अनुपस्थित चिकित्सकों एवं कार्मिकों की सूची तैयार की गई। जिला कलक्टर ने भी चिकित्सकों के रजिस्टर चैक कर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन से स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने अनुपस्थित मिले चिकित्सकों व कार्मिकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद शुक्रवार देर शाम सभी को नोटिस जारी किए गए। शनिवार को करीब 27 चिकित्सकों/कार्मिकों ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया।
इनमें करीब 8 चिकित्सकों ने डे ऑफ, 3 यूटीबी चिकित्सकों ने अवधि विस्तार का इंतजार, 2 ने नाइट ड्यूटी, 3 ने बायो मैट्रिक में अनुपस्थिति, एक मे मेटरनिटी लीव आदि के जवाब दिए हैं।

दवा शॉर्टेज: फार्मासिस्ट व भण्डार प्रभारियों में समन्वय का अभाव

जेएलएन अस्पताल के औषधि भण्डार में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना की अधिकांश दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद काउंटर/दवा स्टोर पर उपलब्ध होने के मामले में समन्वय की कमी सामने आई है। दवा काउंटर पर बैठने वाले फार्मासिस्ट, कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं औषधि भण्डार के प्रभारियों के मध्य समन्वय ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार दवा काउंटर पर संबंधित दवा की शॉर्टेज होने पर सुबह 11 बजे ही डिमांड ऑर्डर भण्डार में भिजवा दिया जाता है मगर भण्डार में दूसरे दिन सुबह 11 बजे बाद ही आपूर्ति संबंधी कार्यवाही शुरू होती है। कई बार तो ऑर्डर की सूचना नहीं होने तथा दवा की उपलब्धता होने पर भी मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटर तक सूचना नहीं दी जाती है और फार्मासिस्ट पर्चियों पर नॉन अवलेबल (एनए) लिख देता है। ऐसे में मॉनिटरिंग की भी कमी सामने आई है। हालांकि प्रशासन की जांच में खुलासा होगा कि आखिर कहां कमी है।