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चुनाव से पहले अफसरों को देना पड़ेगा ये टेस्ट, नहीं हुए पास तो बढ़ेंगी मुश्किलें

50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है। निर्धारित अहर्ता पूरी नहीं करने वाले अधिकारी को दुबारा परीक्षा देनी होगी।

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officers exam before election

officers exam before election

अजमेर।

लोकसभा उप चुनाव -2018 के मतदान को निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अनोखी पहल की है। इसके तहत मतदान करवाने के लिए नियुक्त किए गए पीठासीन अधिकारी व प्रथम मतदान अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है। इस परीक्षा में उन्हें 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है। निर्धारित अहर्ता पूरी नहीं करने वाले अधिकारी को दुबारा परीक्षा देनी होगी।

फिर भी उत्तीर्ण नहीं होने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाी की जाएगी। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान के दौरान अधिकारियों को प्रत्येक जानकारी से अपडेट रखने के लिए परीक्षा का पैटर्न शुरू किया है। 1400 पीठासीन अधिकारी व प्रथम मतदान अधिकारियों को जवाहर रंगमंच तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सभागार में प्रशिक्षण दिया गया तथा इस दौरान परीक्षा भी ली गई।

2000 लोग परीक्षा दे चुके हैं। रविवार को अफसरों को 600 प्रशिक्षण दिया गया। तथा परीक्षा भी ली गई। कुल 4000 पीठासीन अधिकारी व प्रथम मतदान अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह पूछे जा रहे हैं 25 प्रश्न

प्रशिक्षण के दौरान पीठासीन अधिकारी व प्रथम मतदान अधिकारियों को निर्धारित प्रपत्र में 25 वैकल्पिक प्रश्न दिए जा रहे हैं। इनका जवाब उन्हें लिखना पड़ रहा है। इनमें चुनाव, वीवीपेट, चुनाव की टाइमिंग, स्याही किस उंगली में लगाते हैं। चुनाव की टाइमिंग आदि से सम्बन्धित प्रश्न शामिल हैं। जिलेभर में 10 हजार कर्मचारी 1925 मतदान बूथों पर चुनाव की कमान संभालेंगे इनमें 18 सहायक मतदान केन्द्र हैं।

ईवीएम पर उठते रहे हैं सवाल

वर्ष 2014 में हुए लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद आए नतीजों से ईवीएम पर सवाल उठाए गए हैं। बसपा, आम आदमी पार्टी सहित कई दलों ने ईवीएम में गड़बडिय़ों की शिकायतें दी। चुनाव आयोग ने हैकिंग या गड़बड़ी को सिरे से नकार दिया। इसको लेकर आयोग ने हैकर्स को मशीन में गड़बड़ी करके दिखाने के लिए निमंत्रण भी दिया। लेकिन बड़े पैमाने पर कोई गड़बड़ी सामने नहीं आ सकी।

पहली बार हो रही परीक्षा

लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव से पूर्व अधिकारियों की पहली बार ऐसी परीक्षा ली जा रही है। इससे पहले निर्वाचन आयोग निर्धारित चुनाव प्रशिक्षण के बाद ही अधिकारियों की नियुक्ति करता रहा है। पारदर्शिता और अधिकारियों को बिल्कुल सटीक आकलन और जानकारी के लिए ऐसे प्रशिक्षण की शुरुआत की है।