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आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों के आगे कोरोना पराजित,अस्पताल की बजाए घर पर स्वस्थ हुआ वृद्ध दम्पती

सकारात्मक विचार और व्यायाम से बढ़ी रोग प्रतिरोधक क्षमता, घर को ही समझा अस्पताल, बुजुर्ग दंपती ने चिकित्सकीय परामर्श से ली नियमित दवा और आहार

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आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों के आगे कोरोना पराजित,अस्पताल की बजाए घर पर स्वस्थ हुआ वृद्ध दम्पती

आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों के आगे कोरोना पराजित,अस्पताल की बजाए घर पर स्वस्थ हुआ वृद्ध दम्पती

ajmer अजमेर. कोरोना की दूसरी लहर ना केवल बुजुर्ग, बल्कि युवाओं के लिए भी मारक रही है। इसी डरावने दौर में वैशाली नगर निवासी एक वृद्ध दम्पती ने कोरोना से जंग जीतकर हौसला बनाए रख रोग का मुकाबला करने का संदेश दिया है।
एलआईसी कॉलोनी निवासी शांतिलाल जैन (92) तथा विमला देवी (85) एक साथ कोरोना संक्रमित हो गए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल की बजाए दोनों ने घर पर ही इलाज कराना बेहतर समझा। शांतिलाल का एचआरसीटी स्कोर 16 था जो कि कोरोना की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि विमला देवी के लक्षण थोड़े कम थे।

टेलीविजन और अखबारों की खबरों से रहे दूर

जैन के अनुसार उन्होंने कोरोना को चुनौती के रूप में स्वीकार कर मन में हरपल सकारात्मक विचारों को बनाए रखा। टेलीविजन और अखबारों की खबरों से दूर रहे। प्रात: उठने से रात को सोने तक दिनचर्या संयमित रखी। संतुलित आहार और दवा का सेवन किया। नियमित योग-व्यायाम करते रहे। भजन सुने. . भक्ति की. . .। चिकित्सक डॉ. सीमा (जेएलएन-अजमेर) व डॉ. संजय अजमेरा (जयपुर) का परामर्श व उपचार जारी रहा। इसके चलते दोनों ही कोरोना संक्रमण से बाहर आ गए।

कामयाब रही सोच

शांतिलाल के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर में जिस तरह भय का माहौल था उसे हमने हावी नहीं होने दिया। आत्मविश्वास,धैर्य और मनोबल के जज्बे को जीवंत बनाए रखा। अस्पताल में इसलिए भर्ती नहीं हुए कि वहां पहले से चिकित्सकों पर काफी दबाव था। पलंग खाली नहीं थे। कभी ऑक्सीजन की कमी तो कभी वेंटिलेटर का टोटा।

इनका मिला साथ

फिर घर पर शुद्ध वातावरण, शांत माहौल, उचित देखभाल व परिजन की नजदीकी ने भी अचूक दवा का काम किया। वृद्ध दम्पती ने लोगों को संदेश दिया है कि कोरोना से घबराने की आवश्यकता नहीं है। अस्पताल की बजाए घर पर रहकर भी स्वस्थ होना संभव है। वह हमने कर दिखाया है।

इनका कहना है

वैशाली नगर के वृद्ध दम्पती का एंटी वाइरल स्टेरॉइड, खून पतला करने की दवा देने और मनोवैज्ञानिक तरीके से इलाज किया गया। इनके द्वारा नियमित व्यायाम, सकारात्मक विचार और जल्द स्वस्थ होने के जज्बे से कोरोना हावी नहीं हो पाया। घर पर रहकर भी कोरोना पीडि़त स्वस्थ हो सकते हैं।

डॉ. सीमा,जेएलएन अस्पताल,अजमेर