
operation garima
आधी आबादी अब पहले से बेहतर परिस्थितियों में है। विपरीत परिस्थितियों से निबटने के लिए नारी शक्ति सक्षम हो गई है। अब उसे डर या चिंता नहीं है। ऐसा पुलिस का रिकॉर्ड बोल रहा है।
महिलाओं व स्कूल-कॉलेज की छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से शुरू ऑपरेशन गरिमा ज्यादा सार्थक साबित नहीं हो सकी। व्हाट्सएप के भरोसे महिलाओं को सुरक्षा को सुरक्षा देने में ऑपरेशन गरिमा दम तोड़ रहा है जबकि स्कूल कॉलेज के बाहर मनचले अब भी पहले की तरह मंडराते हुए नजर आ रहे हैं।
पुलिस ने चार साल पहले स्कूल-कॉलेज की छात्राओं को मनचलों से बचाने के लिए ऑपरेशन गरिमा अभियान की शुरुआत की। अभियान के पहले चरण में स्कूल-कॉलेज के बाहर भटकने वाले मनचलों को पुलिस ने आड़े हाथों लिया।
लेकिन एक साल पहले दूसरे चरण में बदले स्वरूप ने अभियान को बदल कर रख दिया। महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान रखकर ऑपरेशन मजनूं में पुलिस कन्ट्रोल रूम में 24 घंटे मदद के लिए महिला व्हाट्स-एप व हेल्पलाइन डेस्क बनाई लेकिन सुरक्षा ऑनलाइन होते ही स्कूल-कॉलेज की छात्राओं ने अभियान से मुंह मोड़ लिया।
छात्राएं बदनामी के डर से वाट्स-एप तो क्या पुलिस को मोबाइल पर शिकायत करना मुनासिब नहीं समझती है।
हालात यह है कि बीते एक साल में जनवरी, फरवरी व मार्च को छोड़ दे तो पुलिस कन्ट्रोलरूम में महिला डेस्क व व्हाट्सएप पर एक महीने में एक शिकायत भी नहीं है।
जबकि गल्र्स स्कूल-कॉलेज के बाहर मनचले अब भी पहले की तरह मंडराते है। हालात यह है कि स्कूल-कॉलेज की छुट्टी के वक्त जयपुर रोड सोफिया स्कूल, सावित्री स्कूल-कॉलेज (जीसीसीए) के बाहर बाइकर्स की रेस शुरू हो जाती है।
पहचान छुपाने के लिए चेहरे को स्कार्फ से ढक कर मनचले बाइक दौड़ाते देखे जा सकते हैं।
यहां-यहां रखे नजर
-जयपुर रोड स्थित सोफिया कॉलेज-सावित्री कॉलेज (जीजीसीए) के बाहर-सावित्री स्कूल और चौराहा पर-सेन्ट्रल गल्र्स स्कूल सहित अन्यप्रचार-प्रसार की कमीमहिला डेस्क और व्हाट्सएप पर शिकायतें नहीं मिलने का कारण पुलिस को तलाशने होंगे।
क्या वाकई परिस्थितियां बदल गई या फिर छात्राएं शिकायत करने से कतरा रही है। मामले की तह में जाने पर सामने आया कि आधी आबादी को महिला डेस्क और व्हाट्स एप नम्बर पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हो सके।
प्रचार-प्रसार की कमी के चलते हेल्पलाइन 1098 व महिला वाट्स एप नम्बर का इस्तेमाल ना के बराबर हो रहा है।
यह किए जाए-कॉलेज, स्कूल में महिला डेस्क और व्हाट्स एप नम्बर का प्रचार किया जाए।
-स्कूल कॉलेज में साइन बोर्ड, पोस्टर व पेम्फ्लेट से प्रोत्साहित किया जाए।
-समय-समय पर पुलिस थाना क्षेत्र के गल्र्स स्कूल व कॉलेज के बाहर कार्रवाई करे।
-सेमीनार के माध्यम से छात्राओं को प्रोत्साहित किया जाए।
यह है नम्बर
महिला डेस्क व्हाट्स एप नम्बर 8764853800
महिला हेल्प डेस्क 1090
ऑपरेशन गरिमा तीन साल पहले था। अब व्हाट्स नम्बर, महिला हेल्पलाइन की व्यवस्था है। कोई भी छात्रा, युवती को परेशानी है तो वह हेल्पलाइन पर अपनी पहचान बताए बगैर शिकायत दे सकती है। स्कूल, कॉलेज के बाहर खड़े होने वाले मचलों पर कार्रवाई की जाएगी।
-मालिनी अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अजमेर रेंज
Published on:
04 Oct 2016 12:50 pm
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