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राजस्थान में 100-100 रुपए जोड़कर महिलाएं बनीं ‘करोड़पति’, ‘अमृता’ योजना ने बदली तकदीर, 18 करोड़ की कुल राशि एकत्र

झुंझुनूं में महिला अधिकारिता विभाग से जुड़ी 25 हजार महिलाओं ने 100-100 रुपए की मासिक बचत से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। ‘अमृता सहकारी बहुउद्देशीय सोसायटी’ के तहत महिलाओं ने 18 करोड़ का फंड बनाया, जिससे कम ब्याज पर लोन, चैरिटी और संकट में सहायता संभव हुई।

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Rajasthan Women Turn Crorepatis by Saving 100 Rupees Each

महिलाएं बनीं ‘करोड़पति’ (फोटो-एआई)

झुंझुनूं: छोटी सी बचत जब संकल्प बन जाए, तो वह बड़े बदलाव की इबारत लिख देती है। महिला अधिकारिता विभाग से जुड़ी महिलाओं ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। मात्र 100-100 रुपए के मासिक अंशदान से महिलाओं ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि आज उनके पास करोड़ों रुपए का अपना ‘बैंक’ तैयार हो गया है।

‘अमृता सहकारी बहुउद्देशीय सोसायटी’ योजना के तहत किए जा रहे इस अनूठे प्रयास ने महिला सशक्तीकरण का एक नया मॉडल पेश किया है। झुंझुनूं जिले में इससे जुड़ी करीब 25 हजार महिलाओं के पास 18 करोड़ रुपए का फंड है। इसमें करीब 15 करोड़ 60 लाख वह फंड है, जिसमें वे आपस में लोन लेकर अपने कार्य करती हैं। शेष राशि चैरिटी के लिए तय की गई है।

हर 100 में से 10 रुपए चैरिटी के लिए

मिशन से जुड़ी प्रत्येक महिला हर महीने महज 100 रुपए का अंशदान जमा करती है। इस राशि को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें से 90 रुपए स्वयं के होते हैं, जो उनके व्यक्तिगत भविष्य को सुरक्षित करते हैं। शेष 10 रुपए सामाजिक सरोकार (सोशल फंड) के लिए रखे जाते हैं। इस सामाजिक फंड का उपयोग गांव की ही किसी जरूरतमंद महिला की मदद, शिक्षा या बीमारी जैसे आपातकालीन कार्यों में किया जाता है।

25 हजार महिलाएं, 18 करोड़ का फंड

वर्तमान में इस मुहिम की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 25 हजार महिलाएं इसमें सक्रिय हैं। बूंद-बूंद से घड़ा भरने की तर्ज पर इन महिलाओं ने अब तक 18 करोड़ रुपए का फंड एकत्रित कर लिया है। यह राशि न केवल बैंकों में सुरक्षित है, बल्कि इस पर ब्याज भी मिल रहा है। साथ ही यह महिलाओं के लिए संकट के समय का सबसे बड़ा सहारा भी बन गई है।

महाजनी कर्ज से मुक्ति, खुद का ‘लोन सिस्टम’

पैसे जमा करने के साथ-साथ यह योजना महिलाओं को वित्तीय आत्मनिर्भरता भी प्रदान कर रही है। अब महिलाओं को साहूकारों या बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का आरंभ वर्ष 2014 में कोविड से पूर्व हुआ था। कोविड के दौर में जब सदस्यों को पैसे की जरूरत थी, तब इस फंड से सदस्यों को जीवनदान मिला।

एक दिन में मिलता है लोन

महिलाएं उनकी जरूरत के अनुसार, इसी फंड से लोन लेती हैं। ऐसे में एक दिन में ही उनको लोन मिल जाता है। बाजार की तुलना में बहुत कम ब्याज दर पर पैसा उपलब्ध होता है। इस लोन का उपयोग कई महिलाओं ने सिलाई मशीन खरीदने, पशुपालन, छोटी दुकान खोलने या कृषि कार्यों के लिए किया है या फिर अपने परिजनों को विभिन्न काम के लिए दिलाया है।

कोविड़ में भी सैकड़ों की मदद

यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। महिलाएं अब केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि ‘प्रबंधक’ की भूमिका में हैं। 100 रुपए की यह छोटी सी शुरुआत आत्मनिर्भरता की एक बड़ी क्रांति बन चुकी है। यह योजना पूरे प्रदेश के लिए थी, पर हमने इस पर ज्यादा काम किया। संभव है यह प्रदेश का सबसे बड़ा करोड़पति समूह है। कोविड़ में जब लोगों के पास पैसा खत्म हो रहा था, तब इन महिलाओं ने सैकड़ों परिवारों की मदद की।
-विप्लव न्यौला, उप निदेशक महिला अधिकारिता विभाग, झुंझुनूं

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