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राजस्थान का अनूठा धाम, इस जिले से होती है एंट्री और बाहर निकलते ही पहुंच जाते है हरियाणा

Unique Temple: राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर स्थित झुंझुनूं का रामेश्वरदास धाम अपनी अनोखी परंपराओं और खास बनावट के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां नकद दान पूरी तरह प्रतिबंधित है और भक्तों को निशुल्क प्रसाद दिया जाता है।

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Rameshwar Dham

फोटो: पत्रिका

Baba Rameshwar Das Temple: झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के टीबा बसई गांव में स्थित रामेश्वरदास धाम अपनी भौगोलिक स्थिति और अनूठी परंपराओं के कारण खास पहचान रखता है। दुग्धभागा नदी के तट पर बना यह मंदिर राजस्थान और हरियाणा को जोड़ता है।

मंदिर का प्रवेश द्वार राजस्थान के झुंझुनूं जिले के टीबा बसई गांव में है, जबकि इसका पिछला हिस्सा हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के ब्राह्मणवास गांव की सीमा में आता है। यही कारण है कि यहां राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और दोनों प्रदेशों की संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

मिश्री-पेड़ों का प्रसाद

धाम की एक खास पहचान यह भी है कि यह पूरी तरह दान-मुक्त परिसर है। आधुनिक दौर में, जहां अधिकांश मंदिरों में दान-दक्षिणा की व्यवस्था होती है। वहीं यहां नकद दान पूरी तरह प्रतिबंधित है। मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को मिश्री और पेड़ों का प्रसाद वितरित किया जाता है, जो भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। साथ ही समय पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए रसोई में निःशुल्क प्रसाद की व्यवस्था भी रहती है।

दीवारों पर हजारों तैलीय चित्र उकेरे

मंदिर की दीवारों पर हजारों तैलीय चित्र उकेरे गए हैं। कुशल कारीगरों ने शीशे पर हाथ से गीता और रामायण के श्लोकों की चित्रकारी और लेखन किया है, जो मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। धाम के गीता भवन में श्रीमद्भगवद्गीता के सभी अध्याय कांच की पट्टियों पर उकेरे गए हैं। इस कलाकृति की विशेषता यह है कि पूरी गीता को उल्टे अक्षरों में लिखा है, जो बाहर से देखने पर सीधे और स्पष्ट दिखाई देती है।