
आनासागर झील में प्रदूषण-निर्माण को लेकर एनजीटी में केस दायर
आनासागर झील में बढ़ते प्रदूषण, स्मार्ट सिटी के तहत पाथवे निर्माण, क्रूज संचालन सहित अन्य मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में केस दायर किया है। पूर्व पार्षद अशोक मलिक की याचिका पर एनजीटी ने राज्य सरकार, मुख्य सचिव उषा शर्मा, कलक्टर अंशदीप सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं। मामले की सुनवाई 28 अप्रेल को होगी।
मलिक ने याचिका में बताया कि आनासागर झील में 13 नालों से सीवरेज पानी, कचरा, औद्योगिक इकाइयों की गंदगी जा रही है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने के बावजूद झील जबरदस्त बदबू मार रही है। स्मार्ट सिटी योजना में चारों तरफ पाथ-वे बनाने से यह टैंक में तब्दील हो चुकी है। इससे पानी में गर्माहट बढ़ने से काई, जलकुंभी बढ़ चुकी है। इसमें कचरा-मलबा डालकर लगा पाटा जा रहा है।लूणी नदी का अहम स्त्रोत
मलिक ने याचिका में बताया कि पुष्कर-नाग पहाड़ से निकलने वाली लूणी नदी सीधे आनासागर होते हुए कच्छ के रण तक में पहुंचती है। झील में मिलने वाले घातक केमिकल और सीवरेज युक्त पानी नागौर, जालौर, सिरोही होते हुए गुजरात तक पहुंच रहा है। नगर निगम नियमों को ताक में रखकर झील में क्रूज चलाना चाहता है। यह जैव विविधता, देशी-प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय को खत्म करने का प्रयास है।
झील किनारे औद्योगिक गतिविधियां
आनासागर के आसपास रेस्टोरेंट, शादी-समारोह स्थल, शोरूम, गैराज, कार धोने की दुकानें खुल गई हैं। यह जल (संरक्षण-प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम-1974, वायु संरक्षण-नियंत्रण-1981, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट-2016, नो कंस्ट्रक्शन जोन सहित अन्य अधिनियमों का सीधा उल्लंघन है।
विधायक ने जताई नाराजगी
विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि जिला कलक्टर अंशदीप को पत्र लिखकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आनासागर में ऑक्सीजन लगातार घटने से दुर्गंध फैली हुई है। वे इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे।
Published on:
18 Mar 2023 10:38 am

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