Big issue : राजस्थान के सात करोड़ लोगों पर  मंडरा रहा खतरा , पढ़ें किस खतरे की हो रही बात

Big issue : राजस्थान के सात करोड़ लोगों पर  मंडरा रहा खतरा , पढ़ें किस खतरे की हो रही बात

Sonam Ranawat | Publish: Sep, 08 2018 01:49:55 PM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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उपेन्द्र शर्मा /अजमेर . भारत में लगभग 140 करोड़ लोग रहते हैं। इनमें से 7 करोड़ लोग राजस्थान में रहते हैं। भारत का सबसे बड़ा प्रांत है राजस्थान। देश में जितना भी पानी उपलब्ध है, उसका सिर्फ एक प्रतिशत पानी ही राजस्थान में है जबकि देश के लगभग 5 प्रतिशत लोग यहां रहते हैं। इस एक प्रतिशत पानी का लगभग 80 प्रतिशत पानी मूलत: पीने योग्य नहीं है।

राजस्थान में सिर्फ दो नदियां ही बारहमासी है और उनमें से एक नदी (माही) तो सिर्फ किनारों को (बांसवाड़ा-डूंगरपुर) को तर करती है। यह एक प्रतिशत पानी भी छितराया हुआ है और प्रदेश का 60 प्रतिशत इलाका रेगिस्तानी है।

एक बांध है बीसलपुर। इस पर पहले निर्भर था अजमेर। बाद में 40 लाख की आबादी के शहर जयपुर को भी इसी पर निर्भर कर (अपने ही हाथों रामगढ़ बांध को जिंदा दफन कर) दिया गया। और अब तो धीरे-धीरे 10 और छोटे-बड़े शहर इसी पर निर्भर कर दिए गए हैं। यहां तक कि रेगिस्तानी जिले नागौर तक में इसके पानी की मांग हो रही है।

अजमेर में इन दिनों कुछ इलाकों में 2 दिन, कुछ में तीन दिन पानी आ रहा है। कुछ में थोड़ी देर तो कुछ में बिलकुल नहीं। कुछेक शहरों में ट्रेन से पानी पहुंचाया जा रहा है।

जयपुर चूंकि राजधानी है, तो सबको उसका ख्याल तो रखना ही है। बीसलपुर से जयपुर की दूरी लगभग 135 किलोमीटर है। 135 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछी हुई है। इस पाइपलाइन के किनारों पर बसे 3 जिलों के 24 गांव-कस्बों में लगभग 5 लाख लोग रहते हैं। इन्हें इस पाइपलाइन से एक बूंद भी पानी नसीब नहीं होता है। वे अपनी आंखों के सामने पानी को जाते देखते हैं।


यह सब तो बीत रही है मनुष्यों के साथ। अब आप सोचिए कि खेतों में फसलों और दुधारू जानवरों के साथ क्या हो रहा होगा? उन्हें कहां से पानी नसीब हो रहा होगा। इस बार बारिश भी कम है।

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एक कहावत है चुल्लु भर पानी में... वाली। क्या उनमें से किसी को भी जन प्रतिनिधि कहलाने का हक है, जो यह कहते हैं कि हमें इस जनता ने चुना है। जनता ने चुना है तो क्या गुनाह कर दिया, जिसकी सजा दी जा रही है कि उन्हें पानी भी नसीब नहीं। विपक्ष वाले भी कम नहीं। उन्हें भारत बंद करवाना है किसी और कारण के चलते, पानी के लिए नहीं। यह हालात तब हैं, जब अभी घोषित रूप से अकाल भी नहीं पड़ा है। सरकारों के पास अगर हवा का कोई विभाग होता तो शायद उसकी उपलब्धता में भी कोई लोचा जरूर पड़ता। या वो जयपुर वालों को ज्यादा मिलती और अजमेर वालों को कम और गांव-कस्बों वालों को बिलकुल नहीं।

 

अब थोड़ी सी बात सरकारी अफसरों की। जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर में सिविल लाइंस इलाके हैं। यहां सरकारी अफसरों के बंगले हैं। एक में भी घास सूखी हुई नहीं है। क्यों? यह अलग बात है कि आम लोगों के घरों में पीने के पानी के लिए जो नल लगे हैं वे सूखे हुए हैं। फार्म (खेत) सूख रहे हैं, लेकिन किसी भी बड़े आदमी के फार्म हाउस (ऐशगाहें) सूखे हुए नहीं हैं। वे शहरों से बाहर निकलते ही हाइवे पर दूर-दूर तक फैले-पसरे मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं।

 

अब थोड़ी सी बात देश के बाहर की...।
1. इजरायल में अगर आप अपनी कार को पानी से धोते हैं, तो आपको 2 से पांच या 10 साल तक की जेल हो सकती है। ऐसा कानून दिल्ली, जयपुर या अजमेर में क्यों नहीं बनाया जा सकता क्योंकि यहां तो लोग अपने मकानों तक को रोजाना धोते हैं और कार को तो बारिश के दौरान भी धोते हैं।

2. सिंगापुर में टॉयलेट वॉटर को पेयजल में तब्दील कर दिया गया है। वे बॉटल पर लिखते भी हैं कि यह कौनसा पानी है और उसे बाहर से आए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व अन्य प्रमुख व्यक्तियों तक को परोसते हैं। भारत में ऐसा क्यों नहीं किया जाना चाहिए जबकि हमारे पास तो इतना टॉयलेट वाटर उपलब्ध है कि....आप समझ गए ना क्या-क्या नहीं किया जा सकता।
3. पाकिस्तान के ताजा प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक के लिए सबसे बड़ी समस्या पेयजल को माना है कि दुनिया भर से सहयोग मांग कर भी वो वहां एक बांध बनाने का काम सबसे पहले करना चाहते हैं 4. चीन की नजर में दूसरे देशों की जमीनें ही सबसे कीमती होती हैं। फिर भी चीन इन दिनों से सबसे कीमती चीज किसी को मान रहा है, तो वो भारत की नदी ब्रह्मपुत्र का पानी है। जिसे मोडऩे के जी-तोड़ प्रयास किए जा रहे हैं

भारत.....

दुनिया भर के विकसित देश (भारत भी) चंद्रमा, शनि, मंगल, गुरू, बुध पर पानी खोजने के प्रयास कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की इस क्षमता और मेहनत को लाखों सलाम। लेकिन अगर भारत इसके साथ ही समुद्र के खारे पानी को पेयजल बनाने के प्रोजेक्ट पर काम करे तो। थोड़ा बहुत कर भी रहा है। पर अगर समस्त प्रयासों, पूरे मनोयोग और गंभीरता से किया जाए तो संभवत: आज का यह बड़ा आर्थिक बोझ कल हमारे लिए विकास और जीवित रहने के नए आयाम खोल सकता है।


और सबसे अंत में भारत को अपनी सभी समस्याओं की जड़ बेतहाशा जनसंख्या बढ़ोत्तरी को थामना होगा वरना आज पानी कम पड़ा है, कल हवा भी कम ही पड़ेगी।

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