
पुष्कर . धार्मिक नगरी पुष्कर में पवित्र सावन महीने की हरियाली ओर शनि अमावस्या पर श्रद्धालुओ का अलसुबह से ही ताँता सा लग गया | सेकड़ो श्रद्धालुओ ने पवित्र पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। शनि अमावस्या होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। शनि अमावस्या का धार्मिक ग्रंथो में खास महत्व बताया गया जिसके चलते तीर्थ राज पुष्कर में भी श्रद्धालुओ ने अपने पूर्वजो -पित्रों की आत्म शांति के लिए पिंड दान व तर्पण किये |
देश के कोने कोने से आये सैकड़ो लोगो ने अपनी जन्म कुंडली में मोजूद कालसर्प दोष ,पितृ दोष निवारण के लिए भी पिंड दान व तर्पण कर पूजा अर्चना की | जगत पिता ब्रह्मा मंदिर में भी दर्शन करने श्रद्धालुओ की भीड़ सी उमड़ पड़ी | भारतीय संस्कृति में पवित्र सावन महीने का खास महत्व मान जाता है | सावन महीने के हरियाली अमावस तिथि होने से पुष्कर में यात्रियों की आवक ज्यादा रही वही आज शनिवार को अमावस्या के दुर्लभ सयोग के कारण भी श्रद्धालुओ की आवक अपेक्षाकृत अधिक देखी गई।
त्री संयोग होने से पुष्कर तीर्थ स्थल में पूजा अर्चना दान पुन्य करने की परम्परा आदि अनादि काल से चली आ रही है | धार्मिक परम्परा में पुष्कर को तीर्थो का गुरु माना गया है| तीर्थ राज पुष्कर में जप तप दान पुन्य करने से मनुष्य के सब पाप नष्ट जो जाते है | शास्त्रीय लेके अनोखा अनुसार भारत में कुल 5 स्थानों पर यह अपने पितरों का पिंडदान किया जाता है इनमें गया गंगा कुरुक्षेत्र प्रभास पाटन सोमनाथ और पुष्कर तीर्थ का विशेष महत्व माना गया यही कारण है कि तीर्थराज पुष्कर में अमावस के दिन पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व है तथा दूर दराज से श्रद्धालु आकर अपने साथ कुल के पितरों पूर्वजों का पिंडदान करके उनकी आत्मा शांति की प्रार्थना करते हैं एवं कुल वृद्धि की मनोकामना भी करते है। तीर्थ राज पुष्कर सरोवर में पूर्वजो की आत्मशांति के लिए पिंड दान करने का भी खास महत्व है।