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खुद की बातों में फसा सर्राफा व्यवसायी, इसलिए रची खुद के साथ लूट की झूठी वारदात की कहानी

सदर थाना क्षेत्र के ग्राम बैरवानगर में मंगलवार को हुई लूट झूठी निकली। पुलिस जांच में सामने आया कि सर्राफा व्यवसायी ने खुद ही झूठ की कहानी रच डाली।

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ब्यावर. सदर थाना क्षेत्र के ग्राम बैरवानगर में मंगलवार को हुई लूट झूठी निकली। पुलिस जांच में सामने आया कि सर्राफा व्यवसायी ने खुद ही झूठ की कहानी रच डाली। प्रारम्भिक पड़ताल में सामने आया कि ग्राहकों के जेवर नहीं देने की मंशा के चलते लूट की कहानी रची, जबकि जिस स्थान पर वारदात होने की कहानी बताई गई, वहां मौके पर कोई ऐसे निशान ही नहीं मिले। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

सदर थानाधिकारी सहदेव चौधरी ने बताया कि बिजयनगर रोड निवासी आनन्द सोनी ने बताया कि वह अपनी रतनपुरा घाटा स्थित सर्राफ की दुकान पर जा रहा था। बैरवानगर के पास दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार युवकों ने कांच की बोतल से हमला कर उसका बैग छीनकर भाग गए। जिसमें साढ़े तीन किलो चांदी व एक सौ तीन ग्राम सोने के जेवर एवं 36 हजार 600 रुपए नकद बताए गए। पुलिस ने आनन्द सोनी से पूछताछ की तो पता चला कि उसने एक फाइनेंस कम्पनी के यहां रखे सोने के जेवर एवं एक अन्य ज्वैलर्स के यहां से चांदी के जेवर लाना बताया।

पुलिस इन दोनों ही स्थानों पर पहुंची। यहां पर पड़ताल में पता चला कि 29 जनवरी के बाद सर्राफ ने फाइनेंस के यहां से कोई लेन-देन ही नहीं किया। इसी प्रकार ज्वैलर व्यवसायी ने भी लूट के पीडि़त सर्राफ से किसी प्रकार का व्यापारिक लेन-देन होने से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस रतनपुरा घाटा पहुंचे। जहां पूछताछ में सामने आया कि सर्राफ तो पिछले दो माह से दुकान पर आ ही नहीं रहा है।

दो माह से दुकान बंद पड़ी है। इसके अलावा पुलिस को मौके पर एक भी कांच का टुकड़ा नहीं मिला एवं न ही संघर्ष के निशान नहीं मिले। मोटरसाइकिल से मोपेड के टक्कर मारने की जानकारी दी, जबकि मोपेड के कोई स्क्रेच तक नहीं आ रखा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद सारे तथ्यों को देखकर कार्रवाई की जाएगी।


मोबाइल भी सुरक्षित

पुलिस को वारदात पर इसलिए भी शक हो गया कि वारदात के बाद लूट करने वाले मोबाइल छोड़ गए, जबकि सामान्यतया लूट करने वाले मोबाइल भी ले जाते है। इसके अलावा मोपेड में चाबी लगी हुई थी। इन सारे तथ्यों के आधार पर पुलिस को कहानी झूठी होने का संदेह हुआ। जांच के बाद पुलिस ने माना कि यह पूरी घटना ही गलत रची गइ है।


ऐसे उलझा अपने ही बुने झाल में

पुलिस पूछताछ में सर्राफ ने बताया कि उसका चश्मा टूटने से आरोपितों को देख नहीं सका। इसके अलावा राहगीरों ने 108 को सूचना दी, जबकि 108 एम्बुलेंस वालों से जानकारी ली तो रमेश नामक व्यक्ति ने इसकी सूचना दी। रमेश से जानकारी ली तो पता चला कि आनन्द सोनी ने ही उसको फोन कर घटना होने की जानकारी दी। इससे पुलिस को प्रारम्भिक जांच में मामला झूठा होने का शक हो गया।